धार (ईएमएस)। कथावाचक श्री दीपक जी महाराज जी यजुर्वेद के द्वारा की गई ,,,,इस आयोजन में माता बहनों ने गंगा माता अवतरण,,और भागीरथ जी महाराज की तपस्या की कथा को ,,,,प्रेमपूर्वक श्रवण किया,,, कथा वाचक श्री दीपक जी महाराज ने बताया के राजा भगीरथ की तीसरी पीढ़ी में तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा भगवान शिव की जटा में समाहित हुई,,,, तत्पश्चात् भगवान शिव ने जन कल्याण लोक कल्याण के निमित्त गंगा जी की एक धारा को पृथ्वी पर छोड़ा,,,,और जिस दिन गंगा माता धरती पर अवतरित हुई थी उसे दिन को हम लोग सनातन धर्मी गंगा अवतरणदिवस ,,,अर्थात गंगा दशमी के रूप में मनाते हैं आज हम सभी को मां गंगा की स्वच्छता के लिए संकल्प लेना चाहिए ,,,और गंगा माता की कृपा से सनातन धर्म में अटूट श्रद्धा और विश्वास रखते हुए जनमानस में प्रेम का संदेश पहुंचाना चाहिए,,,,, जब गंगा मां धरती पर आने वाली थी तब उन्होंने राजा भगीरथ से कहा कि लोग मुझ में अपना पाप धोएंगे किंतु मैं इस पाप को कहां पर उतारूंगी ,,,,तब राजा भागीरथ जी महाराज ने कहा कि जब संत समाज आपकी धारा में स्नान करने के लिए उतरेगा तो उनके पुण्य प्रताप से आप भी पाप मुक्त हो जाओगी,,,, गंगा माता का जन मानस में आज भी अटूट प्रेम और विश्वास है,,,और जिस व्यक्ति को मरण काल में गंगाजल का पान कराया जाता है, वह मनुष्य भी सारे पापों को नष्ट करके तत्क्षण मोक्ष को प्राप्त होता है ,,,मां गंगा का विवाह राजा शांतनु से किया गया ,,और मां गंगा के पुत्र राजा भीष्म की भीष्म प्रतिज्ञा भी तीनों लोकों में विख्यात है ,,इस प्रकार से मां गंगा अपने भक्तों को मुक्ति और भक्ति प्रदान करती है,,,,,मां गंगा सबका कल्याण करे,,,, हर हर गंगे ईएमएस / 26/05/2026