अंतर्राष्ट्रीय
28-May-2026
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भारत के लिए गेमचेंजर मॉस्को,(ईएमएस)। रूस के नए दो सीटों वाले एसयू-57डी लड़ाकू विमान के सफल परीक्षण उड़ान के बाद, इसके मुख्य टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने जेट की भविष्य की युद्ध क्षमताओं को लेकर महत्वपूर्ण खुलासे कर दिए हैं। बोगदान के अनुसार, 19 मई को अपनी पहली उड़ान भरने वाला यह विमान केवल एक लड़ाकू जेट नहीं, बल्कि हवा में उड़ता हुआ एक कमांड सेंटर है। सुखोई डिजाइन ब्यूरो के इस मुख्य टेस्ट पायलट ने बताया कि भविष्य की लड़ाई में यह विमान कई तरह की भूमिकाओं को निभा सकता है। उन्होंने बताया कि एसयू-57डी का इस्तेमाल युद्ध के मोर्चे के पास एक कमांडिंग ऑफिसर को तैनात करने के लिए हो सकता है, जो सीधे हवा से युद्धक अभियानों को निर्देशित करेगा। बोगदान ने जोर दिया कि बड़े अभियानों में, खासकर जब संचार बाधित हो सकता है, इसतरह अनुभवी लीडर का हवा में मौजूद रहना निर्णायक साबित होगा। दूसरा पायलट जमीनी नियंत्रण से जुड़ी चुनौतियों को दूर करते हुए, आस-पास के माहौल में बदलावों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद करेगा। उन्होंने बताया कि अगर क्रू में कोई अनुभवी कमांडर हो, तब संचार में रुकावट आने पर भी ऑपरेशन ज्यादा असरदार तरीके से किए जा सकते हैं, जिससे तेजी से निर्णय लेना संभव होता है। बोगदान साल 2000 से सुखोई के चीफ टेस्ट पायलट के तौर पर काम कर रहे हैं और एसयू-57डी की पहली उड़ान भरने से पहले उन्होंने कई प्रोटोटाइप और प्रोडक्शन मॉडल उड़ाए हैं। एसयू-57 रूस का एक स्टील्थ फाइटर जेट है और यह लॉयल विंगमैन क्षमता से लैस होगा। रूस का एमआईजी-31 इंटरसेप्टर भी दो सीटों वाले कॉन्फिगरेशन में विकसित किया गया था ताकि पिछली सीट पर एक वरिष्ठ अधिकारी को बिठाया जा सके। भारत के लिए एसयू-57डी की क्षमताएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारतीय वायुसेना दशकों से दो सीटों वाले लड़ाकू विमान की तलाश में थी, जिसमें एक पायलट उड़ान भरे और दूसरा पायलट कमांड व कंट्रोल का काम संभाले। बोगदान के खुलासे से यह स्पष्ट होता है कि यह जेट एडवांस एआई की मदद से दुश्मन के रडार को पूरी तरह जाम कर सकता है और ओखोत्निक जैसे घातक स्टील्थ ड्रोनों की पूरी सेना को अकेले नियंत्रित कर सकता है। यह एसयू-57डी को लद्दाख और तवांग जैसे पहाड़ी इलाकों में चीनी रडार और एयर डिफेंस को ध्वस्त करने वाले डीप-पेनिट्रेशन मिशन के लिए एक गेम-चेंजर बनाता है। एलएसी के पार चीन ने जो उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम और रडार तैनात कर रखे हैं, वहां भारतीय वायुसेना के सामान्य फाइटर जेट्स के लिए घुसना बेहद जोखिम भरा है। एसयू-57डी की मदद से भारतीय वायुसेना को दुश्मन की सीमा के 100-200 किलोमीटर अंदर जाकर हमला करने के लिए अपने पायलटों की जान जोखिम में नहीं डालनी होगी। इसके अलावा, भारत अपने स्वदेशी कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (सीएटीएस) प्रोग्राम के तहत वारियर जैसे घातक ड्रोन तैयार कर रहा है। रूस का यह ट्विन-सीट विमान इन स्वदेशी ड्रोनों के साथ पूरी तरह से इंटीग्रेट होकर एक शक्तिशाली नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली बना सकता है। चीन के पास पहले से ही दो सीटों वाले 5वीं पीढ़ी के जेट मौजूद हैं और वह हवा में ड्रोन व जेट का एक व्यापक नेटवर्क बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। तिब्बत के पठार पर चीन की इस चाल को नाकाम करने के लिए भारत को इसतरह के ही लड़ाकू विमान की आवश्यकता है जो अपने दम पर लड़ने के बजाय पूरी ड्रोन फ्लीट को गाइड कर सके। भारतीय वायुसेना पिछले 25 वर्षों से इसतरह के विमानों पर विचार कर रही है। दरअसल, 2010 के दशक में जब भारत और रूस संयुक्त रूप से एफजीएफए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, तब भारतीय वायुसेना ने ही रूस से एक सिंगल-सीट के बजाय ट्विन-सीट स्टील्थ जेट की मांग की थी। हालांकि, तकनीकी मतभेदों और रूस की धीमी प्रगति के कारण भारत 2018 में इस प्रोजेक्ट से अलग हो गया था। लेकिन अब जबकि दो सीटों वाले स्टील्थ जेट का सफलतापूर्वक परीक्षण हो गया है, भारतीय रक्षा विशेषज्ञों में इस विमान को लेकर फिर से गहरी दिलचस्पी पैदा हो गई है, जो भविष्य के हवाई युद्ध का चेहरा बदल सकता है। आशीष/ईएमएस 28 मई 2026