काठमांडू (ईएमएस)। नेपाल फिर वैश्विक भू-राजनीतिक शक्ति संघर्ष का केंद्र बना रहा है। अमेरिका अपनी कूटनीतिक सक्रियता को तेजी से बढ़ा रहा है, जिसका नतीजा है कि महीने के अंत में अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर पब्लिक डिप्लोमैसी सराह बी. रोजर्स तीन दिवसीय दौरे पर काठमांडू पहुंच रही हैं। यह यात्रा तब हो रही है जब चीन भी अमेरिका की नेपाल में बढ़ती दिलचस्पी को लेकर पूरी तरह सतर्क है। मीडिया के अनुसार, बी. रोजर्स 30 मई शनिवार को नेपाल पहुंचेंगी। उनकी यह यात्रा बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद अमेरिकी अधिकारियों के लगातार दौरों की श्रृंखला में सबसे महत्वपूर्ण है। इससे पहले, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर और समीर पॉल जैसे अधिकारी नेपाल का दौरा कर चुके हैं, लेकिन सराह का पद इन सभी अधिकारियों से वरिष्ठ है। सराह काठमांडू में विदेश मंत्री से मुलाकात करेंगी और माउंट एवरेस्ट से संबंधित बड़े कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगी। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह प्रधानमंत्री शाह से मिलेंगी या नहीं, जिन्होंने पहले पॉल और गोर से मिलने से इंकार किया था। अमेरिका की लगातार बढ़ती सक्रियता ने चीन के कान खड़े कर दिए है। चीन को आशंका है कि नेपाल में बड़ी संख्या में रह रहे तिब्बती शरणार्थी अमेरिका के लिए जासूसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, जिससे उसके आंतरिक मामलों में अस्थिरता पैदा हो सकती है। दलाई लामा को लेकर अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को देखकर चीन की यह चिंता और भी गहरी हो जाती है। इस भू-राजनीतिक खींचतान का एक और प्रमुख बिंदु दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट भी बन गई है। अमेरिका अपने बेहद शक्तिशाली ड्रोन को ऑक्सीजन बोतल और खाद्य सामग्री की आपूर्ति के लिए एवरेस्ट पर परीक्षण करना चाहता था। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर की पिछली यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य ड्रोन के परीक्षण की अनुमति प्राप्त करना था, लेकिन नेपाल के गृह मंत्रालय ने ऐन मौके पर उड़ान को सुरक्षा संवेदनशीलता और प्रक्रियागत कारणों का हवाला देकर रोक दिया। दूसरी ओर, चीन का 30 ड्रोन 2024 से ही पर्वतारोहियों के लिए सफलतापूर्वक सामग्री पहुंचा रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल ने चीन के दबाव में आकर अमेरिकी ड्रोन को उड़ान की मंजूरी नहीं दी। अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी के जवाब में चीन भी सक्रिय हुआ है और लगातार अपने प्रतिनिधिमंडल नेपाल भेज रहा है। चीन ने नेपाल को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह तिब्बती गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा और अपनी सीमा में किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकना चाहता है। इसके अतिरिक्त, चीन नेपाल पर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने का दबाव बना रहा है, जिसमें नेपाल तक ट्रेन कनेक्टिविटी की उसकी महत्वाकांक्षी योजना भी शामिल है। यह स्थिति दर्शाती है कि हिमालयी राष्ट्र नेपाल अमेरिका और चीन दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मोर्चा बन गया है, जहाँ दोनों महाशक्तियाँ अपने-अपने हितों को साधने का प्रयास कर रही हैं। आशीष/ईएमएस 28 मई 2026