क्षेत्रीय
28-May-2026
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- खागा क्षेत्र में शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ ईद-उल-अज़हा का त्योहार - ईदगाहों व मस्जिदों में अदा की गई नमाज, मुल्क में अमन-चैन और भाईचारे की मांगी गई दुआ - सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन और पुलिस रही मुस्तैद फतेहपुर (ईएमएस)। खागा नगर सहित तहसील क्षेत्र के कस्बों और ग्रामीण इलाकों में गुरुवार को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व शांतिपूर्ण एवं भाईचारे के माहौल में संपन्न हुआ। ईदगाहों और मस्जिदों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विशेष नमाज अदा कर मुल्क में अमन, शांति और आपसी सौहार्द की दुआ मांगी। पर्व के दौरान पुलिस एवं प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया और सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए। खागा नगर स्थित नई बाजार ईदगाह और नूरी मस्जिद में ईद-उल-अजहा की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इस दौरान उपजिलाधिकारी अभिनीत कुमार, पुलिस क्षेत्राधिकारी दुर्गेश दीप, प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार पांडेय सहित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे तथा सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और भाईचारे का संदेश दिया। वहीं हथगाम क्षेत्र में सुबह करीब साढ़े सात बजे ईद की नमाज अदा की गई। यहां मजिस्ट्रेट ओम प्रकाश चौधरी, मलवां थानाध्यक्ष राज किशोर, वरिष्ठ उपनिरीक्षक आलोक कुमार, लेखपाल अमित कुमार सहित पुलिस बल तैनात रहा। प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार चतुर्वेदी त्योहार को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए लगातार क्षेत्र में भ्रमणशील रहे। तहसील क्षेत्र के पट्टी शाह, टिकरी, बंदीपुर, राजापुर कस्बा, छिवलहा, दुदौली, जलालपुर, गौरा, शाहपुर, मोहलिया, रायपुर मुआरी, नारौली खुर्द सहित कई गांवों में ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई तथा कुर्बानी की रस्म निभाई गई। इस दौरान लोगों ने आपसी भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया। इसी कड़ी में ऐरायां क्षेत्र में थाना सुल्तानपुर घोष प्रभारी निरीक्षक तेज बहादुर सिंह के नेतृत्व में प्रेम नगर, मोहम्मदपुर गौंती, सुल्तानपुर घोष, ऐरायां, बहेरा सादात, अल्लीपुर, इजूरा बुजुर्ग, अफोई, मंडवा और आरामपुर बसई, मवई समेत कई गांवों में शांतिपूर्वक ईद की नमाज सम्पन्न हुई। किशनपुर, खखरेरू, धाता और विजयीपुर क्षेत्रों में भी बकरीद का त्योहार शांति और भाईचारे के वातावरण में मनाया गया। - इनसेट बॉक्स क्या है ईद-उल-अजहा का महत्व ईद-उल-अजहा, जिसे बकरीद या ईद-उल-जुहा भी कहा जाता है। त्याग, समर्पण और अल्लाह पर भरोसे का प्रतीक पर्व माना जाता है। इस्लामी मान्यता के अनुसार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म पर अपनी सबसे प्रिय वस्तु की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था। उनके समर्पण और आज्ञाकारिता की याद में मुस्लिम समुदाय हर वर्ष यह पर्व मनाता है। इस अवसर पर कुर्बानी के माध्यम से त्याग, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद का संदेश दिया जाता है। शीबू खान/ ईएमएस 28 मई, 2026