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28-May-2026
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सरकार ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी नई दिल्ली (ईएमएस)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उठापटक के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। सरकार का सीधा मकसद है कि महंगाई के इस दौर में आम जनता, किसानों और नौकरीपेशा वर्ग पर ईंधन का अतिरिक्त बोझ न पड़े। लेकिन अब इस राहत का गलत फायदा बड़े उद्योग उठा रहे हैं। मुनाफे के लालच में कई औद्योगिक इकाइयां थोक (बल्क) सप्लाई के बजाय सीधे आम रिटेल पेट्रोल पंपों से सस्ता डीजल खरीद रही हैं। इस चालाकी से न सिर्फ सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की किल्लत का खतरा भी मंडराने लगा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्र सरकार ने राज्यों को ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दे दिया है। 54 रुपये का बड़ा अंतर बना मुख्य वजह यह पूरा खेल कीमतों में मौजूद एक भारी भरकम अंतर की वजह से शुरू हुआ है। 28 मई के आंकड़ों पर गौर करें, तो राजधानी दिल्ली में आम लोगों के लिए रिटेल डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है। वहीं, उद्योगों के लिए इस्तेमाल होने वाले बल्क डीजल का भाव 149 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है। सीधे तौर पर प्रति लीटर 54 रुपये का बड़ा फर्क है। दरअसल, औद्योगिक ग्राहकों के लिए ईंधन के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से तय होते हैं, जबकि आम जनता को राहत देने के लिए रिटेल कीमतें सरकार के नियंत्रण में हैं। इसी भारी अंतर का फायदा उठाने के लिए उद्योग अपना बल्क कोटा छोडक़र आम पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे हैं। सरकारी कंपनियों को रोजाना 550 करोड़ का घाटा बड़े स्तर पर हो रही इस हेराफेरी का सबसे बुरा असर देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों की सेहत पर पड़ रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस पर इन कंपनियों को रोजाना औसतन 550 करोड़ रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। जो सब्सिडी या वित्तीय राहत आम जनता की जेब बचाने के लिए दी जा रही थी, उसका एक बड़ा हिस्सा अब उद्योग अपने मुनाफे के रूप में डकार रहे हैं। अर्थशास्त्र के नजरिए से यह स्थिति बिल्कुल भी टिकाऊ नहीं है। गड़बड़ी करने वालों पर चलेगा कानूनी डंडा आम लोगों के हिस्से का ईंधन सुरक्षित रखने के लिए सरकार पूरी तरह से हरकत में आ गई है। केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे जमीनी स्तर पर विशेष टीमें बनाएं और पेट्रोल पंपों की सघन निगरानी करें। अगर कोई भी व्यक्ति या कंपनी कालाबाजारी, अवैध भंडारण या गलत तरीके से बल्क की जगह रिटेल तेल की खरीद-फरोख्त करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, इसलिए आम लोगों को किसी तरह की घबराहट में आने की जरूरत नहीं है।