अंतर्राष्ट्रीय
29-May-2026
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मॉस्को (ईएमएस)। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक ऐसा घातक हथियार इन दिनों दुनिया भर के सैन्य विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे आसमान में ट्रैक करना नामुमकिन माना जा रहा है। यह आधुनिक हथियार पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह सीधे रास्ते पर नहीं चलता, बल्कि किसी जहरीले सांप की तरह हवा में जिग-जैग यानी लहराते हुए आगे बढ़ता है। इसकी अकल्पनीय रफ्तार और पल-पल अपना रास्ता बदलने की अद्भुत चालाकी के सामने पश्चिमी देशों के सबसे आधुनिक रडार सिस्टम भी पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। यहाँ तक कि अमेरिका का अरबों डॉलर की लागत से बना थाड मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी इसके सामने एक लाचार खिलौने जैसा नजर आता है। वैश्विक सैन्य संतुलन को पूरी तरह से बदलने वाले इन आधुनिक हथियारों में रूस के एवनगार्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल का नाम सबसे ऊपर आता है। जब साल 2018 में रूस ने अपने छह सबसे घातक रणनीतिक हथियारों की घोषणा की थी, तब एवनगार्ड को रूसी तकनीकी सर्वोच्चता का प्रतीक बताया गया था और दिसंबर 2019 में इसे सेना में तैनात किया गया। यह संहारक हथियार परमाणु हमला करने की बेजोड़ क्षमता रखता है। एवनगार्ड को शुरुआत में आरएस-18बी या आधुनिक आरएस-28 सरमत जैसी भारी इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइलों के ऊपर पेलोड के रूप में फिट करके अंतरिक्ष की ओर दागा जाता है। एक निश्चित ऊंचाई पर पहुँचने के बाद यह ग्लाइड व्हीकल मुख्य रॉकेट से अलग हो जाता है और पृथ्वी के वायुमंडल की ऊपरी परतों में प्रवेश करता है। इसके बाद इसकी असली खतरनाक उड़ान शुरू होती है, जहाँ यह भौतिकी के पारंपरिक नियमों को चुनौती देते हुए दुश्मन के सुरक्षा चक्र को अंधा कर देता है। अगर इसकी मारक क्षमता की बात करें तो एवनगार्ड एक बेहद शक्तिशाली इंटर-कॉन्टिनेंटल हथियार है। भारी आईसीबीएम मिसाइलों पर माउंट होने के कारण इसकी प्रभावी रेंज 6,000 किलोमीटर से लेकर 18,000 किलोमीटर से भी अधिक है। इसका मतलब है कि रूस अपने घर में बैठे-बैठे ही अमेरिका या दुनिया के किसी भी कोने में पलक झपकते ही सटीक हमला कर सकता है। विनाशकारी ताकत के मामले में यह 2 मेगाटन तक का परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। इसकी भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हिरोशिमा पर गिराया गया परमाणु बम केवल 15 किलोटन का था। इसके अलावा, अत्यधिक गति से पैदा होने वाली काइनेटिक ऊर्जा के कारण यह बिना परमाणु बम के भी सिर्फ टकराकर भारी तबाही मचा सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस 29 मई 2026