राष्ट्रीय
29-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाईकोर्ट और निचली अदालतों में फैसलों में होने वाली देरी पर कड़ा रुख दिखाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने न्यायपालिका की मूल जिम्मेदारी बताकर लंबित मामलों को अनिश्चितकाल तक रोकने को अस्वीकार्य किया है। सुप्रीम कोर्ट ने समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण और बाध्यकारी निर्देश जारी किए हैं। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग कर शीर्ष अदालत ने सभी हाईकोर्ट को लंबित मामलों में अधिकतम 3 महीने के अंदर निर्णय सुनाने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि फैसले के मुख्य हिस्से को सुनाने की तिथि ही निर्णय की आधिकारिक तिथि मानी जाएगी। शीर्ष अदालत ने जोर दिया कि हाईकोर्ट देश की प्राथमिक न्यायिक संस्थाएं हैं, जहां लाखों लोग न्याय की उम्मीद से पहुंचते हैं, इसके बाद समय पर निर्णय न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से जमानत मामलों में होने वाली देरी पर गहरी चिंता जाहिर की। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि जमानत से जुड़े आदेश उसी दिन या अधिकतम अगले दिन तक जारी किए जाएं। इसके साथ ही, निचली अदालतों को भी निर्देश दिए गए हैं कि नियमित जमानत आदेशों की जानकारी तुरंत संबंधित जेल प्रशासन तक पहुंचाई जाए, ताकि विचाराधीन कैदियों की रिहाई में अनावश्यक विलंब न हो। पीठ ने माना कि कई बार जमानत मिलने के बावजूद तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं के कारण कैदियों को अतिरिक्त समय जेल में बिताना पड़ता है, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी फैसलों को सुनाए जाने के 24 घंटे के भीतर संबंधित हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करे। हालांकि, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि ये निर्देश किसी न्यायाधीश या न्यायिक संस्था पर सवाल उठाने के लिए नहीं हैं, बल्कि न्यायिक प्रणाली में बढ़ते लंबित मामलों और फैसलों में देरी की समस्या को देखकर एक समान व्यवस्था स्थापित करना आवश्यक हो गया था। यह आदेश झारखंड हाई कोर्ट में फैसले सुनाने में देरी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। कोर्ट का मानना है कि न्याय में अनावश्यक देरी लोगों के न्याय व्यवस्था पर भरोसे को कमजोर करती है, और इस रोकना समय की मांग है। आशीष दुबे / 29 मई 2026