क्षेत्रीय
29-May-2026
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इंदौर (ईएमएस)। आईआईटी इंदौर एवं आयोजित आईसीआईटीएस आईएफ़ 2026अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के संकाय सदस्यों द्वारा रोग प्रबंधन एवं रोकथाम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका विषय पर एक महत्वपूर्ण शोधपत्र प्रस्तुत किया गया। इस शोधपत्र में एआई कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से कैंसर की प्रारंभिक पहचान, पूर्वानुमान, जोखिम मूल्यांकन एवं रोकथाम के नवीन आयामों पर प्रकाश डाला गया। इस संगोष्ठी में फार्मेसी संकाय के डॉ. प्रवीण खिरवड़कर तथा प्रबंधन संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो.डॉ. धर्मेंद्र मेहता,डा सलिल सिंह, डा. केना भोंसले, डा.अंकिता शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से शोध प्रस्तुति दी गई। शोधपत्र में विभिन्न अध्ययन, आंकड़ों एवं तकनीकी विश्लेषणों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियाँ असाध्य गंभीर रोगों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर समय रहते प्रभावी रोकथाम एवं उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। प्रस्तुति के दौरान शोधकर्ताओं ने बताया कि मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स एवं प्रेडिक्टिव मॉडलिंग जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से रोगियों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर संभावित कैंसर जोखिमों का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ रोगों के प्रभावी प्रबंधन में भी सहायता मिलेगी।संगोष्ठी में उपस्थित विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं एवं शिक्षाविदों ने इस शोधकार्य की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। शोधपत्र में विशेष रूप से कैंसर की रोकथाम, शीघ्र निदान, व्यक्तिगत उपचार रणनीतियों तथा जनस्वास्थ्य प्रबंधन में एआई की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उल्लेखनीय है कि आईआईटी इंदौर द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में देश-विदेश के अनेक शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं ने भाग लिया। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के शिक्षकों की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी।इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा, प्रो डा शैलेन्द्र कुमार शर्मा कुलानुशासक प्रो डा दीपक गुप्ता प्रो डा.कामरान सुल्तान फार्मेसी संकायाध्यक्ष प्रो. डॉ. कमलेश दशोरा, विश्वविद्यालय प्रशासन एवं विभिन्न संकायों के शिक्षकों ने शोधकर्ताओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इस प्रकार के नवाचार आधारित अनुसंधान समाज एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।