देवास (ईएमएस)। बांध से अन्य क्षेत्रों में जल स्थानांतरण की संभावनाओं को लेकर पूर्व महापौर शरद पाचुनकर ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि देवास शहर ने पांच दशकों से अधिक समय तक भीषण जल संकट झेला है और लंबे संघर्ष के बाद शिप्रा जिला जलवर्धन योजना के माध्यम से शहर को स्थायी जल आपूर्ति की दिशा में राहत मिली थी। ऐसे में वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए देवास के हिस्से का पानी अन्यत्र देना न्यायोचित नहीं होगा। पाचुनकर ने बताया कि उनके महापौर कार्यकाल में शिप्रा जिला जलवर्धन योजना पूर्ण हुई थी, जिससे वर्षों से जल संकट से जूझ रहे शहरवासियों को बड़ी राहत मिली। उन्होंने कहा कि शहर की लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण आज भी अतिरिक्त जल की आवश्यकता महसूस की जा रही है और कई क्षेत्रों में पेयजल संकट बना हुआ है। उन्होंने कहा कि देवास के नागरिकों ने जल संकट के कारण अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। वर्षों के संघर्ष और जनभावनाओं के परिणामस्वरूप बांध और जल परियोजनाओं का निर्माण संभव हो पाया था। ऐसे में यदि देवास के जल संसाधनों को अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाता है, तो यह शहर की जनता के साथ अन्याय होगा। पूर्व महापौर ने नगर निगम प्रशासन से आग्रह किया कि इस विषय पर कोई भी निर्णय लेने से पहले शहर की वर्तमान और भविष्य की जल आवश्यकताओं का गंभीरता से आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि देवास की जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पाचुनकर ने प्रदेश के प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने और देवास के नागरिकों की भावनाओं एवं जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय सुनिश्चित करने की मांग की।