बदलापुर, (ईएमएस)। ठाणे जिले के अंबरनाथ और मुरबाड तालुका की सीमा पर स्थित बारवी बांध के आसपास का जंगल अपनी समृद्ध जैव विविधता और दुर्लभ पक्षियों के लिए जाना जाता है। इसी क्षेत्र में पाया जाने वाला बेहद दुर्लभ और शर्मीला पक्षी “मलबार ट्रोगोन”, जिसे स्थानीय भाषा में “मलबारी कर्णा” भी कहा जाता है, इन दिनों कुछ उत्साही पक्षीप्रेमियों और फोटोग्राफरों की गलत गतिविधियों के कारण गंभीर संकट का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल में पक्षियों को करीब से देखने या उनकी तस्वीरें लेने के लिए मोबाइल फोन पर कृत्रिम पक्षी आवाजें चलाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। इस तकनीक को “बर्ड कॉलिंग” कहा जाता है। इसके जरिए मलबार ट्रोगोन की आवाज मोबाइल पर बजाई जाती है, जिससे जंगल में मौजूद नर पक्षी भ्रमित हो जाता है। उसे लगता है कि उसके क्षेत्र में कोई दूसरा नर पक्षी आ गया है या कोई उसे पुकार रहा है। इसी कारण वह अपनी सुरक्षित जगह छोड़कर आवाज की दिशा में आने लगता है। पक्षी विशेषज्ञ शाहिद शेख कहते हैं कि पिछले 15 से 20 दिनों से मुरबाड के जंगलों में लगातार इस तरह की गतिविधियां देखी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह समय मलबार ट्रोगोन के प्रजनन का मौसम है और ऐसे संवेदनशील समय में कृत्रिम आवाजों का इस्तेमाल पक्षियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यह पक्षी बार-बार अपने घोंसले या सुरक्षित स्थान को छोड़ता है, तो उसकी जोड़ी टूट सकती है। इसके अलावा अंडे और छोटे बच्चे असुरक्षित हो जाते हैं। प्रजनन काल के दौरान यह पक्षी काफी शांत और एकाग्र अवस्था में रहता है, ऐसे में शिकारी पक्षियों द्वारा हमला होने की आशंका भी बढ़ जाती है। वन्यजीव प्रेमियों ने यह भी चिंता जताई है कि लगातार बर्ड कॉलिंग के कारण मलबार ट्रोगोन एक ही स्थान पर बार-बार दिखाई देने लगता है। इससे उस इलाके में लोगों की भीड़ बढ़ जाती है। लगातार मानवीय हस्तक्षेप से यह दुर्लभ पक्षी अपना प्राकृतिक आवास हमेशा के लिए छोड़ सकता है, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता को बड़ा नुकसान पहुंचेगा। जानकारी के अनुसार, मूल रूप से दक्षिण भारत के जंगलों, सिंधुदुर्ग, गोवा के कुछ हिस्सों और कर्नाटक के दांडेली अभयारण्य में पाया जाने वाला यह पक्षी पहली बार वर्ष 2012 में मुरबाड के वन क्षेत्र में देखा गया था। मुंबई और ठाणे के नजदीक इस दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी के कारण बड़ी संख्या में पक्षीप्रेमी और फोटोग्राफर यहां पहुंच रहे हैं। मानद वन्यजीव रक्षक अविनाश हरड कहते हैं कि केवल अच्छी तस्वीर लेने या पक्षी को नजदीक से देखने के लिए प्रकृति के नियमों के खिलाफ जाकर बर्ड कॉलिंग करना बेहद गलत और क्रूर है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि प्राकृतिक संपदा को बचाना है तो पक्षियों के प्राकृतिक आवास में अनावश्यक हस्तक्षेप बंद करना होगा। वहीं वन क्षेत्रपाल संजय धारवणे ने कहा कि पक्षी प्रेमियों और विशेषज्ञों से शिकायत मिलने के बाद वन विभाग ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है। पक्षी निरीक्षण के समय कर्मचारियों को तैनात किया गया है ताकि इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। संतोष झा- २९ मई/२०२६/ईएमएस