नई दिल्ली(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील और खतरनाक समुद्री रास्तों में से एक बन गया है। हाल ही में सीजफायर लागू होने के बावजूद, इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही अब भी बड़े पैमाने पर ठप है। ओमान और ईरान के बीच स्थित इस संकरे समुद्री रास्ते से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में मचे इस भारी संकट और उथल-पुथल के बीच, भारत अपने जहाजों को वहां से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक बेहद खास और गोपनीय रणनीति पर काम कर रहा है। जानकारी के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में वर्तमान में 13 भारतीय व्यावसायिक जहाज मौजूद हैं। इस बेड़े में एक एलपीजी टैंकर, पांच कच्चे तेल के टैंकर, एक केमिकल टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर शामिल हैं। भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता इन सभी जहाजों और उन पर सवार चालक दल को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर निकालना है।रणनीति की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने इसके संचालन की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय रखा है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि इस पूरे अभियान का समन्वय विदेश मंत्रालय के जरिए किया जा रहा है। कौन सा जहाज पहले इस खतरे वाले क्षेत्र से बाहर निकलेगा, इसकी प्राथमिकता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा उर्वरक मंत्रालय के साथ मिलकर तय की जा रही है। इसी आपसी तालमेल के आधार पर जहाजों को धीरे-धीरे सुरक्षित निकाला जा रहा है। सरकार के इन प्रयासों का सकारात्मक असर भी दिखाई देने लगा है। हाल ही में करीब 2,70,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आ रहा निसोस केरोस नामक क्रूड ऑयल टैंकर सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करने में कामयाब रहा, जिसके जून की शुरुआत तक विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है। अब तक 14 जहाज इस खतरनाक मार्ग को सुरक्षित पार करके भारत लौट चुके हैं, जबकि 11 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं और उन पर नजर रखी जा रही है। पब्लिक डोमेन में उपलब्ध शिप ट्रैकिंग डेटा से जहाजों की सुरक्षा को होने वाले संभावित खतरे पर अधिकारियों का कहना है कि ये कमर्शियल ऐप्स हैं, जिनका कोई भी इस्तेमाल कर सकता है। सार्वजनिक डेटा का उपयोग कैसे होगा, यह उपयोगकर्ता की नीयत पर निर्भर करता है, लेकिन फिलहाल यह डेटा सरकार को जहाजों की स्थिति ट्रैक करने में सहायता दे रहा है। गौरतलब है कि युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया था, क्योंकि भौगोलिक स्थिति के कारण इस रूट पर उसका दबदबा है। इसी डर से दुनिया की कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग से अपने जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। इसके विपरीत, भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए इस रूट से व्यापार जारी रखा है। भारी जोखिम के बावजूद शिवालिक, नंदा देवी, जग लाडकी, पाइन गैस और बीडब्ल्यू टायर जैसे कई भारतीय जहाजों ने इस तनावपूर्ण जलमार्ग को सुरक्षित पार कर भारत की रणनीतिक कुशलता को साबित किया है। वीरेंद्र/ईएमएस/30मई 2026