चर्बी और रसायनों से तैयार घी के कारोबार की चर्चा, कार्रवाई के अभाव पर उठ रहे सवाल नीरज चक्रपाणि हाथरस (ईएमएस)। जिले में नकली देशी घी के कारोबार को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शुद्ध देशी घी के नाम पर बाजार में बड़े पैमाने पर मिलावटी और नकली घी बेचा जा रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। बताया जा रहा है कि कम लागत में तैयार किए जा रहे इस घी को असली घी के रूप में बेचकर उपभोक्ताओं की जेब और सेहत दोनों पर चोट की जा रही है।क्षेत्रीय लोगों का दावा है कि जिले और आसपास के इलाकों में कुछ स्थानों पर नकली घी तैयार किया जाता है, जिसे एजेंटों के माध्यम से कस्बों और ग्रामीण बाजारों तक पहुंचाया जाता है। कम कीमत होने के कारण लोग इसे खरीद लेते हैं, लेकिन उन्हें इसकी गुणवत्ता और शुद्धता की वास्तविकता का अंदाजा नहीं होता।चर्चाओं के अनुसार नकली घी तैयार करने में विभिन्न प्रकार के वसा युक्त पदार्थों और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट की जाती है तो उसका लगातार सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है और इससे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय-समय पर शिकायतें होने के बावजूद खाद्य सुरक्षा और संबंधित विभागों की ओर से अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वालों के हौसले बुलंद बने हुए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों के बीच यह चर्चा लगातार बनी हुई है कि बिना प्रभावी निगरानी के ऐसा कारोबार लंबे समय तक चल पाना संभव नहीं है।जानकारों का कहना है कि उपभोक्ताओं को बेहद सस्ते दाम पर मिलने वाले घी और प्रतिष्ठित ब्रांडों से मिलते-जुलते पैकेजिंग वाले उत्पादों से सतर्क रहना चाहिए। कई बार मिलावटी उत्पादों को इस तरह पैक किया जाता है कि आम व्यक्ति असली और नकली में अंतर नहीं कर पाता।वरिष्ठ किसान नेता धर्मेंद्र प्रधान ने जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की है कि जिले में विशेष अभियान चलाकर घी निर्माण इकाइयों, डेयरियों और बाजार में बिक रहे संदिग्ध उत्पादों के नमूने लिए जाएं तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यह केवल मिलावट का मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा गंभीर विषय है। ईएमएस/ नीरज चक्रपाणी/ 30 मई 2026