अंतर्राष्ट्रीय
31-May-2026
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अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर दागी थीं मिसाइलें तेहरान (ईएमएस)। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अप्रैल में अमेरिका की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम के कुछ ही दिनों बाद ईरान के भीतर भीषण जवाबी हवाई हमले किए थे। इस रिपोर्ट के अनुसार, यूएई के इन गोपनीय हवाई हमलों में ईरान के कई रणनीतिक और बेहद संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इन हमलों की जद में फारस की खाड़ी में स्थित लावन द्वीप पर बनी एक प्रमुख तेल रिफाइनरी, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित केश्म और अबू मूसा द्वीप, बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और ईरान का विशाल असालुयेह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल थे। असालुयेह ऊर्जा केंद्र पर हुए इस बड़े हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंताएं बढ़ा दी थीं, जिसके बाद अमेरिका ने इजरायल पर भी दबाव बनाया कि वह ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोके, ताकि पूरे खाड़ी क्षेत्र में एक सर्वविनाशकारी युद्ध को भड़कने से रोका जा सके। सूत्रों के हवाले से सामने आई इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूएई ने ईरान के खिलाफ इस बड़े सैन्य अभियान को अंजाम देने के लिए अमेरिका और इजरायल के साथ पर्दे के पीछे से कड़ा समन्वय किया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि युद्धविराम की आधिकारिक घोषणा होने के बाद भी यूएई का यह सैन्य अभियान कई हफ्तों तक लगातार जारी रहा। जहां एक तरफ अन्य खाड़ी देशों ने ईरान के साथ सीधे सैन्य टकराव से बचने और अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का उपयोग न होने देने का कड़ा रुख अपनाया था, वहीं यूएई ने इन सबसे अलग बेहद आक्रामक भूमिका चुनी और सीधे ईरान के भीतर बमबारी की। इस गोपनीय सैन्य अभियान ने खाड़ी देशों के आपसी मतभेदों को भी उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष के शुरुआती दौर में यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के प्रति गहरी नाराजगी जताई थी, क्योंकि रियाद ने ईरान विरोधी इस साझा सैन्य अभियान में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया था। सऊदी अरब ने बाद में वाशिंगटन के सामने यह गंभीर चिंता जताई थी कि यूएई के इन हवाई हमलों से पूरे खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ठिकानों पर ईरान के जवाबी हमलों का खतरा बेहद बढ़ रहा है। इसी खतरे को देखते हुए सऊदी ने अमेरिका से इन समन्वित सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रुकवाने का आग्रह भी किया था। दरअसल, यूएई की इस आक्रामकता के पीछे ईरान द्वारा पहले किया गया एक बड़ा हमला था। इससे पहले ईरान ने यूएई पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन से भीषण हमला किया था, जिससे यूएई को जान-माल और आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा था। उस दौरान लगभग 2,800 से अधिक मिसाइलें और ड्रोन दागे गए थे, जिन्होंने अमेरिकी थाड और पैट्रियट जैसी अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों के बावजूद यूएई के डिफेंस नेटवर्क को आंशिक रूप से बेअसर कर दिया था, जिसके जवाब में यूएई ने यह गुप्त जवाबी कार्रवाई की। वीरेंद्र/ईएमएस 31 मई 2026