रुस और तालिबान शासन के बीच हुआ गुप्त समझौता मॉस्को (ईएमएस)। दशकों की दुश्मनी और सोवियत संघ की अफगानिस्तान से वापसी के लंबे अरसे बाद, रूस और तालिबान शासन के रिश्ते में एक नाटकीय बदलाव दिखाई दिया है। हाल ही में दोनों देशों के बीच सैन्य समझौता हुआ है, इस समझौते ने यूक्रेन युद्ध में तालिबानी लड़ाकों की संभावित भागीदारी को लेकर नई अटकलों को जन्म दिया है। रूस द्वारा तालिबान को आतंकवादी संगठनों की सूची से हटाने और उनके साथ संबंध मजबूत करने के बाद हुए समझौते की गोपनीय शर्तों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि तालिबान ने रूस के साथ सहयोग को महत्वपूर्ण बताया है, लेकिन समझौते का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे इसकी आंतरिक शर्तों का अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है। इस गुप्त सैन्य सहयोग के बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया हैं कि रूस, यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में तालिबानी लड़ाकों को शामिल कर सकता है। इस संदर्भ में रूस के 2024 में उत्तर कोरिया के साथ हुए रक्षा समझौते का भी जिक्र हो रहा है, जिसके तहत उत्तर कोरियाई सैनिकों को कुर्स्क क्षेत्र में लड़ने की बात सामने आई थी। कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि रूस के कुर्स्क में मौजूद उत्तर कोरियाई सैनिक, तालिबानी लड़ाकों को असममित युद्ध के लिए भर्ती कर सकते हैं। हालांकि, अधिकांश विशेषज्ञ ऐसी संभावनाओं को कम आंकते हैं। उनका तर्क है कि रूस की आर्थिक स्थिति मुफ्त सैन्य सहायता की अनुमति नहीं देती, और तालिबान के पास भी बड़ी मात्रा में सैन्य उपकरण खरीदने के लिए धन नहीं है। एक जानकार के अनुसार, यूक्रेन युद्ध के कारण रूस न अफगानिस्तान को भारी हथियार दे सकता है और न ही तालिबान आर्थिक तंगी के चलते खरीद सकता है। इसके बाद हथियारों की मदद की उम्मीद कम ही है। इसके बाद सवाल उठता है कि इस समझौते में छिपा क्या है और दोनों पक्षों को इससे क्या हासिल होगा। रूस के लिए, यह समझौता पश्चिम-विरोधी गठबंधन को मजबूत करने का एक माध्यम है, जिसमें पहले से ही चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश शामिल हैं। मॉस्को अफगानिस्तान में अमेरिका के किसी भी सैन्य अड्डे के खिलाफ है और इस क्षेत्र में खुद को पश्चिमी प्रभाव के मुकाबले एक ताकत के रूप में स्थापित करना चाहता है। वहीं तालिबान के लिए, समझौता रूस जैसे शक्तिशाली देश के साथ संबंध स्थापित करके अपने अंतरराष्ट्रीय अलगाव को समाप्त करने का मौका है। इसके अलावा, अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए हथियारों के रखरखाव और सैन्य प्रशिक्षण में रूस की मदद तालिबान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यह समझौता दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक फायदे वाला दिख रहा है, भले ही यूक्रेन युद्ध में सीधी सैन्य भागीदारी की अटकलें हकीकत से दूर हों। आशीष/ईएमएस 01 जून 2026