अंतर्राष्ट्रीय
01-Jun-2026


वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका की ओर से हाल ही में मिली प्रतिक्रिया और आपत्तियों के बाद, ईरान ने संभावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के मसौदे में अपने अनुसार कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करने का फैसला किया है। तेहरान के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने मसौदा समझौते के कुछ प्रमुख हिस्सों में अपनी ओर से संशोधन करके उसे वापस भेजा था, जिस पर अब ईरान भी जवाबी संशोधन करने की तैयारी में है। रणनीतिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में इस समझौते को लेकर कुछ भी अंतिम नहीं माना जा सकता है। ईरान केवल उसी मसौदे को स्वीकार करेगा, जिस पर उसकी पूर्ण सहमति होगी। अमेरिका द्वारा किए गए एकतरफा बदलावों का यह कतई मतलब नहीं है कि तेहरान उन्हें बिना शर्त मंजूर कर लेगा। मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस शांति समझौते के मसौदे के कुछ हिस्सों पर कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिकी प्रशासन को सबसे ज्यादा आपत्ति ईरान की अंतरराष्ट्रीय बैंकों में जमी हुई संपत्तियों (फ्रोजन एसेट्स) को जारी करने वाले प्रावधानों पर है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी पक्ष इस समझौते में ईरान के परमाणु पदार्थों और उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर और अधिक सख्त शर्तें जोड़ने की मांग पर अड़ा हुआ है। दोनों देश वर्तमान में एक ऐसे कूटनीतिक समझौते को अंतिम रूप देने का प्रयास कर रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य इस वर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुए युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना है। इस भीषण सैन्य संघर्ष के बाद दोनों पक्षों के बीच 8 अप्रैल को एक अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) लागू हुआ था। पिछले कुछ हफ्तों से पड़ोसी देश पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए दोनों पक्ष युद्ध को स्थाई रूप से खत्म करने की शर्तों को लेकर कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान कर रहे हैं। इस कूटनीतिक खींचतान के बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक ईरानी जनता के राष्ट्रीय अधिकार पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक तेहरान किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। संसद की एक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ किया कि उनके वार्ताकारों को विरोधी पक्ष के खोखले वादों पर कोई भरोसा नहीं है। ईरानी संसद अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि सैन्य मोर्चे के बाद अब विरोधी ताकतें आर्थिक दबाव और मीडिया प्रचार के जरिए देश के भीतर मतभेद पैदा करके ईरान को झुकाने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने कड़े तेवर दिखाते हुए यह भी कहा कि ईरान किसी बातचीत से नहीं, बल्कि अपनी मिसाइल और सैन्य क्षमता के दम पर दुनिया से रियायतें हासिल करता है। वीरेंद्र/ईएमएस/01जून2026