अंतर्राष्ट्रीय
01-Jun-2026
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कीव(ईएमएस)। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने वैश्विक सुरक्षा और हथियारों की आपूर्ति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका में एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन मौजूदा मांग के मुकाबले पर्याप्त नहीं है, जिससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में गंभीर संकट पैदा हो सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी चिंता साझा करते हुए जेलेंस्की ने बताया कि एक तरफ जहां पश्चिमी देशों में उत्पादन धीमा है, वहीं दूसरी तरफ रूस अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों के घरेलू उत्पादन को लगातार बढ़ाने में जुटा हुआ है। इस रणनीतिक असंतुलन को देखते हुए उन्होंने व्हाइट हाउस और अमेरिकी कांग्रेस को एक औपचारिक पत्र भी भेजा है। जेलेंस्की ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए हर महीने महज 60 से 65 एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन बेहद कम है। उन्होंने साफ किया कि यह कोई छिपी हुई बात नहीं है और रूस भी इस विनिर्माण कमी से अच्छी तरह वाकिफ है। इस कमी को दूर करने के लिए यूक्रेनी राष्ट्रपति ने वाशिंगटन से मांग की है कि यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइल प्रणालियों के उत्पादन का लाइसेंस दिया जाए। उनका मानना है कि यदि यूक्रेन को यह तकनीकी अधिकार मिलता है, तो वे स्वयं पैट्रियट मिसाइलों का उत्पादन तेजी से बढ़ा सकते हैं। इससे न केवल यूक्रेन को अपनी रक्षा करने में मदद मिलेगी, बल्कि मध्य पूर्व और उन अन्य सहयोगी देशों को भी फायदा होगा जिनकी मदद करने का फैसला भविष्य में अमेरिका करेगा। अपने एक हालिया साक्षात्कार का अंश साझा करते हुए जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की सेना उन सभी रूसी ड्रोनों को हवा में ही नष्ट करने की कोशिश कर रही है, जो रोमानिया, मोल्दोवा, पोलैंड या बाल्टिक देशों की सीमाओं की ओर बढ़ रहे होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समयसीमा का जिक्र करते हुए कहा कि अगली सर्दियों की शुरुआत से पहले हर हाल में कोई कूटनीतिक रास्ता निकाला जाना चाहिए और बातचीत शुरू होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर उनके अपने समाज का कितना दबाव बनता है और अमेरिका व यूरोप मिलकर रूस पर कितने प्रभावी आर्थिक प्रतिबंध लगाते हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने दावा किया कि दिसंबर 2025 से रूसी सेना ने युद्ध के मैदान में अपनी बढ़त खोनी शुरू कर दी थी। संभावित शांति वार्ताओं के संदर्भ में उन्होंने ई3 प्रारूप (यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और जर्मनी) का उल्लेख किया और कहा कि ये देश यूरोप की ओर से मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने नॉर्डिक देशों को भरोसेमंद साझेदार बताया और युद्धबंदियों की सुरक्षित वापसी में मध्यस्थ के रूप में तुर्की द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की। वीरेंद्र/ईएमएस/01जून2026