क्षेत्रीय
01-Jun-2026


बालाघाट (ईएमएस). फसलों की सिंचाई के लिए मोटर पंप को कुएं में नीचे तक उतारने, मोटर पंप को सुधारने या अन्य कारणों से किसानों को कुएं में उतरना पड़ता है। ऐसी स्थिति में कई बार दुर्घटना हो जाती है और कुएं में उतरने वाले व्यक्ति की आक्सीजन की कमी से दम घुटने के कारण मृत्यु हो जाती है। बालाघाट जिले में विगत वर्षों में ऐसी अनेक घटनायें हो चुकी हैं, जिनमें जनहानि हुई है। इन्ही तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर मृणाल मीना ने जिले के किसानों, ग्रामीणों एवं आमजन से अपील की है कि यदि किन्ही कारणों से कुएं में उतरना जरूरी हो तो कुएं में उतरने से पहले उसमें जहरीली गैस की जांच अवश्य कर लें। जांच के बाद जब संतुष्ट हो जायें कि कुएं में जहरीली गैस नहीं है और उतरना पूरी तरह से सुरक्षित है तभी कुएं में उतरें। खेतों एवं अन्य स्थानों पर सीमेंट-कांक्रीट से बने हुए कुएं हैं, ऐसे कुओं में गोबर, पेड़ों की पत्तियां या अन्य जैविक पदार्थों के विघटन से पानी की सतह के ऊपर जहरीली गैस कार्बन डाय आक्साईड, कार्बन मोनो आक्साईड, हाईड्रोजन सल्फाईड, अमोनिया, नाईट्रोजन डाय आक्साईड बन जाती है। इन गैसों के कारण कुएं में आक्सीजन की कमी हो जाती है और जब कोई व्यक्ति कुएं में बगैर सावधानी के उतरता है तो दम घुटने से उसकी मृत्यु हो जाती है। जब भी किसी व्यक्ति को कुएं में उतरना बहुत जरूरी हो तो इन गैसों की कुएं में मौजूदगी की जांच अवश्य कर लें। ऐसे की जा सकती है जांच कुएं में जहरीली गैस की जांच के लिए आसान उपाय अपनाये जा सकते हैं। इसके लिए जलता हुआ दिया रस्सी के सहारे कुएं के पानी की सतह ले जायें। यदि दिया पानी की सतह के पास जाकर बुझ जाता है तो समझ लें कि कुएं में जानलेवा जहरीली गैस मौजूद है। कुएं से जहरीली गैस को बाहर निकालने के लिए एक छाते को फैलाकर उसे रस्सी के सहारे उल्टा पानी की सतह तक ले जायें और अंदर की हवा को छाते से बार-बार ऊपर की ओर खींचे। बार-बार ऐसा करने से कुएं के भीतर मौजूद जहरीली गैस बाहर निकल जायेगी। उल्टे छाते से जहरीली गैस को बाहर निकालने के बाद एक बार फिर से जलता हुआ दिया रस्सी के सहारे पानी की सतह तक ले जायें। यदि दिया पानी की सतह के पास जाकर बुझता नहीं है और अच्छे से जलता रहता है तो समझ जायें कि कुएं में जहरीली गैस मौजूद नहीं है। कुएं से जहरीली गैस को बाहर निकालने के लिए ऊपर से पानी का छिडक़ाव भी किया जा सकता है। भानेश साकुरे / 01 जून 2026