:: सेलम में टैपिओका की आवक घटने से उत्पादकों को उचित मूल्य का अवसर; मिलेट्स बाजार में भी दिखा मिला-जुला रुख :: इंदौर/सेलम (ईएमएस)। देश के प्रमुख साबूदाना और मिलेट्स बाजारों में स्टॉक की कमी और मांग के उतार-चढ़ाव ने उत्पादकों व व्यापारियों के सामने रणनीतिक निर्णय लेने की स्थिति पैदा कर दी है। तमिलनाडु के सेलम से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, इस वर्ष साबूदाना और टैपिओका (कसावा) की आवक में उल्लेखनीय कमी आने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुमानों के मुताबिक, आगामी वर्षों में कम वर्षा के चलते अगले दो से तीन साल तक उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित रह सकती है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनौतीपूर्ण समय उत्पादकों के लिए अपनी मेहनत का सही मूल्य प्राप्त करने का एक दुर्लभ अवसर साबित हो सकता है। साबु ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड, सेलम के चेयरमैन गोपाल साबु का कहना है कि पिछले चार दशकों के अनुभव के आधार पर वर्तमान परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन यह उत्पादकों और व्यापारियों के लिए अपनी फसल का वास्तविक मूल्य प्राप्त करने का अवसर भी है। उम्मीद है कि किसान और मिलर समुदाय जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेगा। आने वाले समय में उत्पादन की कमी और फलाहारी सीजन की मांग से बाजार को सहारा मिलेगा। :: मिलेट्स बाजार में उतार-चढ़ाव का रुख :: मोटे अनाजों (मिलेट्स) के बाजार में इन दिनों काफी हलचल देखी जा रही है। स्टॉक की भारी किल्लत के चलते बार्नयार्ड मिलेट यानी झंगोरा के दामों में सबसे ज्यादा लगभग 20 रुपये प्रति किलो की तेजी आई है। वहीं दूसरी ओर लिटिल मिलेट यानी मोरधन का सीजन समाप्त होने से मंडियों में इसकी आवक बंद हो चुकी है। अब इसका नया माल सितंबर में ही उपलब्ध हो सकेगा, जिसके चलते तैयार माल की मजबूत मांग से इसके भाव भी करीब 10 रुपये प्रति किलो उछल गए हैं। :: कोदो और रागी के भावों में मामूली बढ़त :: मिलेट्स की अन्य श्रेणियों की बात करें तो कोदो मिलेट यानी कोदरा में पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है, जिसके कारण बाजार में केवल 2 रुपये प्रति किलो की मामूली बढ़त देखी गई है। फिंगर मिलेट यानी रागी के बाजार में भी हल्की मजबूती दर्ज की गई है और इसके भाव 1 से 2 रुपये प्रति किलो तेज रहे हैं। इन सबके बीच फॉक्सटेल मिलेट यानी कंगनी का बाजार पूरी तरह स्थिर बना हुआ है और इसका व्यापार पुराने भावों पर ही बिना किसी बदलाव के चल रहा है। :: नारियल बूरा बाजार में आई भारी मंदी :: मिलेट्स और साबूदाने से विपरीत, नारियल बूरा (डेसीकेटेड कोकोनट) के बाजार को बड़ा झटका लगा है। पिछले एक महीने के भीतर इसके दाम लगभग 50 रुपये प्रति किलो तक टूट चुके हैं। बाजार के इस मंदे रुख के पीछे तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं, जिनमें पहला तमिलनाडु और कर्नाटक में नारियल की बंपर पैदावार होना है। इसके अलावा खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थितियों के कारण निर्यात ठप्प होना और घरेलू स्तर पर एलपीजी गैस की किल्लत से औद्योगिक मांग का घटना भी इसकी बड़ी वजह है। :: साबूदाने में गुणवत्ता वाले माल की कमी :: साबूदाना और स्टार्च बाजार के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में सेलम के बाजार में करीब 79,000 टन साबूदाना और 20,000 टन स्टार्च का स्टॉक उपलब्ध है। हालांकि, इस कुल स्टॉक में उच्च गुणवत्ता वाले माल का प्रतिशत बेहद कम है क्योंकि सीजन के अच्छे माल की आवक लगातार घट रही है। टैपिओका कंद का सीजन समाप्त होने के बाद अब नई फसल सितंबर-अक्टूबर में ही आएगी। वहीं आगामी दिनों में अधिक मास और श्रावण मास के चलते फलाहारी वस्तुओं की मांग में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे निकट भविष्य में कीमतों में मंदे के आसार नहीं हैं। :: व्यापारियों को फूंक-फूंककर कदम रखने की सलाह :: बाजार की वर्तमान अनिश्चितता को देखते हुए बाहरी मंडियों के व्यापारियों को फिलहाल बहुत सावधानी से काम करने की जरूरत है। व्यापारी भाई बाजार में अपनी तात्कालिक मांग और जरूरत के हिसाब से ही हर भाव में माल लेते रहें और अपने हाथ में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखें। अगस्त महीने में जब एक बार फिर बाजार की सही और वास्तविक स्थिति साफ हो जाएगी, तभी आगे की बड़ी या थोक खरीदारी का रणनीतिक निर्णय लेना व्यापारिक दृष्टि से उचित रहेगा। प्रकाश/02 जून 2026