-लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने बताई भविष्य की रणनीति -सेना में शामिल होंगे उन्नत निगरानी सिस्टम, नासिक में 59 अधिकारियों ने पूरी की एविएशन ट्रेनिंग नासिक,(ईएमएस)। आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए सेना प्रशिक्षण कमान के प्रमुख देवेंद्र शर्मा ने कहा, कि उन्नत ड्रोन सिस्टम भविष्य के युद्धक्षेत्र में ‘गेम चेंजर’ साबित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना अब ऐसे आधुनिक ड्रोन अपने बेड़े में शामिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है, जो निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और लक्ष्य पहचानने की क्षमता को कई गुना बढ़ाएंगे। महाराष्ट्र के नासिक स्थित ट्रेनिंग सेंटर (सीएटीएस) में आयोजित एक समारोह के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने यह जानकारी दी। इस अवसर पर भारतीय सेना के 59 अधिकारियों ने अपनी एविएशन ट्रेनिंग पूरी की, जिनमें से 25 अधिकारियों को बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद प्रतिष्ठित फ्लाइंग विंग्स प्रदान किए गए। उन्होंने कहा कि यह समारोह केवल प्रशिक्षण की सफलता का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय सेना की उस तैयारी को भी दर्शाता है जिसके तहत अधिकारियों को आधुनिक युद्धक्षेत्र की जटिल चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है। उनके अनुसार, सीएटीएस में पायलटों को लगभग तीन महीने की अवधि में बेसिक, एडवांस्ड और युद्ध-केंद्रित प्रशिक्षण दिया जाता है। लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने बताया कि पिछले 23 वर्षों में इस संस्थान ने 1,794 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है, जिनमें करीब 20 महिला अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा कई मित्र देशों के सैन्य अधिकारियों ने भी यहां प्रशिक्षण प्राप्त किया है। स्थापना के समय जहां संस्थान में केवल तीन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित होते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 18 हो गई है। हर वर्ष लगभग 150 अधिकारियों को विभिन्न एविएशन और ऑपरेशनल कोर्स के तहत प्रशिक्षित किया जाता है। उन्होंने कहा कि सेना के लिए हेलीकॉप्टर संचालन, सामरिक उड़ान, युद्धक्षेत्र समन्वय और हवाई अभियानों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों, ऊंचे पर्वतीय इलाकों और आपदा राहत अभियानों में प्रशिक्षित एविएशन अधिकारियों की भूमिका अहम हो गई है।‘एक्सरसाइज एविएशन शक्ति’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इस अभ्यास के माध्यम से सेना की हवाई युद्धक क्षमताओं का प्रदर्शन किया जाता है। इसमें निगरानी, सैनिकों की त्वरित तैनाती, रसद सहायता और सामरिक अभियानों के संचालन की क्षमता को परखा जाता है। ड्रोन तकनीक पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक ड्रोन उन्नत इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, लंबी उड़ान क्षमता और रीयल-टाइम टेलीमेट्री सिस्टम से लैस होते हैं। ये दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने और महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में ऐसे ड्रोन सेना की निर्णय लेने की क्षमता और परिचालन दक्षता को और मजबूत करेंगे। हिदायत/ईएमएस 02जून26