अंतर्राष्ट्रीय
03-Jun-2026
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ईरान के साथ परमाणु समझौते पर चर्चा वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी राजनीति में शायद ही कोई ऐसा मुद्दा रहा हो, जिस पर डोनाल्ड ट्रंप ने बराक ओबामा की उतनी तीखी आलोचना की हो, जितनी 2015 की ईरान परमाणु डील को लेकर की थी। ट्रंप ने उस समय जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन को अमेरिकी इतिहास का सबसे खराब समझौता बताया था। साल 2018 में राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने इस डील से अमेरिका को बाहर निकालकर इसे अपनी सबसे बड़ी विदेश नीति उपलब्धियों में गिनाया था। लेकिन अब हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि ईरान के साथ नए समझौते की कोशिशों में ट्रंप को उसी पुराने मॉडल का सहारा लेना पड़ सकता है, जिसे उन्होंने कभी पूरी दुनिया के सामने नाकाम और खतरनाक करार दिया था। यही वजह है कि अमेरिका में एक नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है कि क्या ट्रंप वास्तव में कोई नई और मजबूत डील बना रहे हैं या सिर्फ पुराने समझौते को ही नए पैकेज में पेश करने की कोशिश हो रही है। दिलचस्प बात यह है कि ईरान के साथ चल रही मौजूदा बातचीत के कई बिंदु सीधे तौर पर ओबामा युग के जेसीपीओए की याद दिलाते हैं। प्रस्तावित समझौते में युद्धविराम बढ़ाने, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई वार्ता शुरू करने जैसी शर्तें शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अगले 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन न करे और कभी परमाणु हथियार विकसित न करने की गारंटी दे, जिसे तेहरान फिलहाल खारिज कर रहा है। ट्रंप जब पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तब उन्होंने दावा किया था कि ओबामा प्रशासन ने ईरान के सामने घुटने टेक दिए हैं और इस डील ने तेहरान को अरबों डॉलर दिए। लेकिन अमेरिका के पीछे हटने के बाद ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज कर दिया। जहां 2015 की डील के तहत ईरान केवल 3.67 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन कर सकता था, वहीं आज वह 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम जमा कर चुका है, जो हथियार-ग्रेड स्तर के बेहद करीब है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वार्ता का पूरा ढांचा ओबामा युग की डील पर ही आधारित नजर आता है। दोनों में फर्क सिर्फ इतना है कि अब इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की बात जोड़ी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, ट्रंप इस बात को लेकर बेहद चिंतित होंगे कि उनकी डील की तुलना ओबामा की डील से न की जाए, क्योंकि उस समझौते को खत्म करना उनके पहले कार्यकाल की सबसे बड़ी पहचान थी। यदि नई डील में भी ईरान को प्रतिबंधों से राहत और जमे हुए अरबों डॉलर तक पहुंच मिलती है, तो ट्रंप के लिए अपने समर्थकों को यह समझाना मुश्किल होगा कि यह समझौता पुराने समझौते से किस तरह अलग और बेहतर है। वीरेंद्र/ईएमएस 03 जून 2026