03-Jun-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। क्या आप जानते हैं कि हमारे प्राचीन योग विज्ञान में एक ऐसा प्राकृतिक और अद्भुत तरीका मौजूद है, जो बिना किसी बिजली के खर्च या रासायनिक दुष्प्रभाव के आपके शरीर को भीतर से शिमला जैसी मनमोहक ठंडक प्रदान कर सकता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं शीतकारी प्राणायाम की, जिसे भीषण गर्मी से राहत पाने का एक अचूक मंत्र माना जाता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, शीतकारी शब्द का शाब्दिक अर्थ ही ठंडक पैदा करने वाला या शीतल करने वाला होता है। इस प्राणायाम का अभ्यास करते समय मुंह से एक विशेष सी-सी की आवाज निकलती है, जो भीतर हवा खींचने की प्रक्रिया से उत्पन्न होती है। कड़कड़ाती धूप से आने के बाद यदि आप इसका अभ्यास करते हैं, तो यह शरीर को फौरन शांत करता है और गर्मी से होने वाली बेचैनी को दूर करता है। गर्मियों में चलने वाली गर्म हवाएं या लू अक्सर शरीर को बीमार कर देती हैं और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ाती हैं। शीतकारी प्राणायाम का नियमित अभ्यास शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और आपको लू की चपेट में आने से बचाता है। अत्यधिक गर्मी के कारण अक्सर लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं, मानसिक थकान महसूस करते हैं और एकाग्रता में कमी आती है। यह प्राणायाम दिमाग को शीतलता प्रदान कर तनाव (स्ट्रेस) और चिंता (एंग्जायटी) को प्रभावी ढंग से कम करता है, जिससे मानसिक शांति और स्पष्टता आती है। इसके अतिरिक्त, यदि आप किसी ऐसी विषम परिस्थिति में हैं जहां तेज गर्मी है और पानी की कमी है, तो यह प्राणायाम आपकी अत्यधिक प्यास और भूख को नियंत्रित करने में भी सहायक सिद्ध हो सकता है। त्वचा संबंधी समस्याओं, जैसे गर्मी में होने वाले मुंहासे, घमौरियां और स्किन रैशेज, का मुख्य कारण शरीर की आंतरिक गर्मी होती है। शीतकारी प्राणायाम रक्त को शुद्ध कर त्वचा को भीतर से ठंडा रखता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है। इस प्राणायाम का सही अभ्यास करने के लिए कुछ चरणों का पालन करना आवश्यक है। सबसे पहले, किसी शांत और हवादार जगह पर सुखासन या पद्मासन में आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं। अपनी रीढ़ की हड्डी और गर्दन को बिल्कुल सीधा रखें। अब अपने ऊपर और नीचे के दांतों को आपस में मिला लें और होठों को थोड़ा खोलकर दांतों को बाहर की तरफ दिखाएं। इसके बाद, अपनी जीभ को दांतों के पीछे सटाते हुए, मुंह से धीरे-धीरे सांस अंदर खींचें। सांस खींचते समय एक हल्की सी-सी की आवाज उत्पन्न होगी। इस ठंडी हवा को अपने तालू और गले में महसूस करें। सांस को भीतर खींचने के बाद मुंह बंद कर लें और अपनी क्षमता के अनुसार 3 से 5 सेकंड के लिए सांस को अंदर ही रोककर रखें। अंत में, बिना मुंह खोले, दोनों नथुनों (नासापुटों) से धीरे-धीरे सांस को पूरी तरह बाहर छोड़ दें। शुरुआती दिनों में इसे 5 से 7 बार दोहराएं और धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाकर 15 से 20 बार तक ले जा सकते हैं। गर्मियों के मौसम में यह प्राणायाम शरीर के बढ़ते तापमान को तुरंत नियंत्रित करने और आंतरिक गर्मी, जिसे आयुर्वेद में पित्त के रूप में जाना जाता है, को शांत करने में असाधारण रूप से प्रभावी है। इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास, विशेषकर सुबह 5 से 10 मिनट का, शरीर को कई हैरान कर देने वाले लाभ प्रदान करता है। यह प्राणायाम आपके तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को उत्तेजित करता है, जिससे शरीर का आंतरिक तापमान तेजी से सामान्य होता है। सुदामा/ईएमएस 03 जून 2026