03-Jun-2026
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- मिसाइल संकट ने बढ़ाई जेलेंस्की की चिंता कीव(ईएमएस)। रूस ने मंगलवार देर रात यूक्रेन पर हाल के महीनों का सबसे बड़ा और विनाशकारी हवाई हमला किया है। सैकड़ों ड्रोन और दर्जनों अत्याधुनिक मिसाइलों से कीव सहित पूरे देश को निशाना बनाया गया। इस भीषण हमले में कम से कम 23 लोगों की मौत हो गई और 90 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यूक्रेनी वायुसेना द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रूस ने इस हमले में 656 ड्रोन और 73 मिसाइलें दागीं। हालांकि, यूक्रेनी एयर डिफेंस सिस्टम ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई खतरों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन इसके बावजूद 54 ड्रोन और 33 मिसाइलें सुरक्षा कवच को भेदने में कामयाब रहीं, जिससे कई इलाकों में आवासीय इमारतें जमींदोज़ हो गईं। इस हमले ने यूक्रेन की सबसे बड़ी सैन्य कमजोरी को एक बार फिर दुनिया के सामने उजागर कर दिया है, जो कि पैट्रियट एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों की भारी कमी है। पैट्रियट सिस्टम रूस की एडवांस बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सबसे अचूक माना जाता है, लेकिन यूक्रेन के पास इसकी बेहद सीमित संख्या है। राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की ने भी खुलकर स्वीकार किया कि मौजूदा हथियार आपूर्ति के सहारे वे इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलों को रोकने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों से तुरंत सैन्य मदद की गुहार लगाई है। पैट्रियट मिसाइलों की इस किल्लत के पीछे मुख्य वजह अमेरिका की सीमित उत्पादन क्षमता है। अमेरिका इस प्रणाली का मुख्य उत्पादक है, लेकिन उसकी सालाना उत्पादन क्षमता अभी सिर्फ 650 मिसाइलों के आसपास ही है। इसके अलावा, ईरान के साथ हालिया संघर्ष में अमेरिका और इजरायल द्वारा इन मिसाइलों का भारी इस्तेमाल किए जाने से वैश्विक स्टॉक और कम हो गया है। साथ ही, ट्रंप प्रशासन की अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत अमेरिका पहले अपनी आंतरिक सुरक्षा जरूरतें पूरी कर रहा है, जिसके कारण यूक्रेन को आपूर्ति मिलने में देरी हो रही है। बदलते हालात के बीच राष्ट्रपति जेलेंस्की ने व्हाइट हाउस और अमेरिकी कांग्रेस को पत्र लिखा है। अब तक यूक्रेन सीधे तौर पर तैयार हथियार मांग रहा था, लेकिन अमेरिका के पास घटते स्टॉक को देखते हुए अब जेलेंस्की ने मिसाइलों का प्रोडक्शन लाइसेंस मांगा है। यह कदम यूक्रेन की बढ़ती हताशा के साथ-साथ एक बड़े प्रतीकात्मक बदलाव को भी दिखाता है, जहां कभी हथियार मांगने वाला देश अब खुद निर्माण तकनीक की मांग कर रहा है। रूस इस स्थिति का फायदा उठाकर हमले तेज कर रहा है। यदि पश्चिमी देशों ने जल्द ही बड़े पैमाने पर मदद नहीं भेजी, तो यूक्रेन के शहरों पर तबाही का खतरा और गहरा सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस/03जून2026