क्षेत्रीय
06-Jun-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जंगल मितान छत्तीसगढ़ संस्था की ओर से पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन किया गया । 27 खोली स्थित बाजपेयी परिसर में आयोजित इस पर्यावरण संगोष्ठी का यह 33वां वर्ष है। इस अवसर पर वक्ताओं ने प्रमुख रूप से जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण संवर्धन के लिए युवा पीढ़ी को अभियान के साथ जोडऩा चाहिए। पर्यावरण दिवस छत्तीसगढ़ के वातावरण के अनुकूल हरेली पर्व के अवसर पर मनाया जाना चाहिए । यह संगोष्ठी पर्यावरण चुनौती, उपाय और निदान विषय पर आयोजित थी । इस अवसर पर पर्यावरणविद्, चिंतक विवेक जोगलेकर ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को आयोजित होता है । यह यूरोप के लिए उपयुक्त हो सकता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के लिए एक अलग से पर्यावरण दिवस घोषित होना चाहिए। जो इस प्रदेश के वातावरण के अनुकूल हो। उन्होंने छत्तीसगढ़ जंगल मितान संस्था से इसके लिए पहल करने और इस अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण ऐसा विषय है जिसमें युवाओं को जोडऩा जरूरी है। जो पर्यावरण संतुलन के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने पर्यावरण ट्रैकिंग और पेड़ पौधों से युवाओं को जोडऩे की दिशा में अपने अनुभव भी सजा साझा किए। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.देवधर महंत ने कहा कि पर्यावरण को विभिन्न प्रदूषणों से बचाना एक गंभीर विषय है। अगर हम आज इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा सके तो आने वाले समय में जीना मुश्किल हो जाएगा। इस समय वायु ,जल ,मृदा सभी तरह के प्रदूषण है। इसका आम जन जीवन पर विपरीत असर पड़ रहा है। हमारे आसपास लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं । उसके लिए कानून तो बहुत बने हैं । लेकिन प्रकृति के साथ अंतर्संबंध को स्थापित करते हुए हमें चिपको आंदोलन जैसी मुहिम की जरूरत है। यह सोचकर इस दिशा में आगे बढऩा चाहिए कि वृक्ष हमारी संस्कृति हमारी आत्मा से जुड़े हुए हैं। डॉ.शकुंतला जितपुरे ने बताया कि प्रदूषण की वजह से किस तरह की बीमारियां हो रही हैं। खेतों में केमिकल के उपयोग और उससे पैदा हुए अन्य का उपभोग कर हम तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। जिनमें अस्थमा, ब्रोंकाइटिस ,कैंसर प्रमुख है। उन्होंने इसके लिए समाज में जन जागरण को आवश्यक बताया । इस अवसर पर सेवा निवृत्त अधीक्षण अभियंता चंद्र मोहन बाजपेई ने कहा कि जब भी कोई सरकारी प्रोजेक्ट बनते हैं तो वहां कटने वाले पेड़ों के बदले वृक्षारोपण के लिए काफी राशि वन विभाग को दी जाती है। यह राशि कई सौ करोड़ में है। इस राशि का कितना उपयोग हो रहा है इस पर हम सबको नजर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी हासिल की जानी चाहिए कि कितनी राशि वन विभाग को दी गई है और उसका कहां-कहां उपयोग किया गया है। डॉ.विवेक सिंह चंदेल ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि चारों तरफ पर्यावरण को क्षति पहुंचाने के लिए काम हो रहे हैं। जिसे रोकने के लिए हम सबको मिलकर काम करना चाहिए । वरिष्ठ नागरिक मंच के अध्यक्ष अरविंद दीक्षित ने भी इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संतुलन पर बहुत अधिक बातें होती हैं। लेकिन तब तक कोई ठोस काम नहीं हो सकता जब समाज के सभी क्षेत्र के लोग इस दिशा में आगे आए। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रूद्र अवस्थी ने भी पर्यावरण और जल संरक्षण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब भी कोई सरकारी प्रोजेक्ट बनता है और उसके नाम पर पेड़ काटे जाते हैं तो प्लानिंग ऐसी होनी चाहिए कि काम शुरू होने के कई वर्ष पहले नए पौधे लगा दिए जाएं ।जिससे पेड़ों की कटाई से पहले ही भरपाई हो जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण किया जाना चाहिए। लेकिन जिस तरह बिलासपुर शहर के चारों तरफ कोलवॉशरी के जरिए जल का बेतहाशा उपयोग हो रहा है, इस पर भी बंदिश लगाई जानी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल पर्यावरण दिवस पर विचार मंथन की बजाय हमें वर्ष भर इस बारे में न केवल चर्चा करना चाहिए बल्कि नागरिक मंच बनाकर इसकी निगरानी भी करनी चाहिए। पर्यावरण गोष्ठी में राजीव नयन शर्मा ने भी अपने विचार रखें । कार्यक्रम का संचालन संस्था के संस्थापक पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश बाजपेयी ने किया। अतिथियों का पटुका पहनाकर स्वागत जंगल मितान छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष चंद्र प्रदीप बाजपेई पूर्व पार्षद ने किया। इस अवसर पर परिसर में पौधरोपण भी किया गया। कार्यक्रम की खास बात रही कि पर्यावरण गोष्टी हरे-भरे पेड़ पौधों के बीच की गई। जिसमें डॉ उषा किरण बाजपेयी, किरण शुक्ला, शत्रुघन सिंह सिकरवार, मनहरन पुरी गोस्वामी, शेलेन्द्र कुमार शुक्ला, बी आर भशज, लक्ष्मी दास देवांगन, सीमा यादव, श्वेता पांडेय, किरन मुले, त्रिवेणी भोई, डॉ विवेक चंदेल, चन्द्र मोहन बाजपेयी, डॉ भूपेन्द्र धर दीवान, राजेश शुक्ला, प्रभात मिश्रा, दिलीप तिवारी, मोहम्मद हसन रिज़वी, भूनेश्वर, भावना, हर्षा, दीपेश, चन्द्र भानू बाजपेयी, छेदी सिंह ठाकुर, राम नारायण पटेल, जैत राम सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी उपस्थित थे। - 06 जून 2026