राष्ट्रीय
07-Jun-2026
...


नई दिल्ली (ईएमएस)। कोल्हमपुर माता का प्राचीन मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और विशेष परंपराओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित इस मंदिर को लेकर भक्तों का विश्वास है कि माता के दर्शन और सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से जीवन की अनेक परेशानियों के साथ-साथ नेत्र संबंधी कष्टों में भी राहत मिलती है। इसी आस्था के चलते प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचते हैं। मंदिर के महंत दीनदयाल वैश्य के अनुसार यहां एक विशेष ज्योति निरंतर प्रज्वलित रहती है। श्रद्धालु पहले इस पवित्र ज्योति के दर्शन करते हैं और फिर उससे प्राप्त घी को प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि इस घी का उपयोग आंखों पर करने से नेत्र संबंधी समस्याओं में लाभ मिलता है। हालांकि मंदिर प्रशासन और महंत इसे पूरी तरह श्रद्धा और धार्मिक विश्वास का विषय मानते हैं। दीनदयाल वैश्य बताते हैं कि मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध मान्यता आंखों की रोशनी से संबंधित है। उनका कहना है कि जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ माता के चरणों में प्रार्थना करते हैं, उन्हें माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कई श्रद्धालु अपने अनुभव भी साझा करते हैं, जिनमें उन्होंने आंखों की समस्याओं से राहत मिलने का दावा किया है। मंदिर परिसर में पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, जबकि नवरात्रि और अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष रूप से भारी भीड़ उमड़ती है। भक्त पूजा-पाठ के साथ अपनी मनोकामनाएं भी माता के समक्ष रखते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। महंत दीनदयाल वैश्य के अनुसार यह पवित्र ज्योति पिछले चार से पांच दशकों से लगातार जल रही है। इसकी एक विशेषता यह भी बताई जाती है कि इसकी वास्तविक गहराई के बारे में आज तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। इसके बावजूद यह ज्योति चौबीसों घंटे अखंड रूप से प्रज्ज्वलित रहती है, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि कोल्हमपुर माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विश्वास और उम्मीद का प्रतीक है। महंत के अनुसार यहां एक ऐसा परिवार भी पहुंचा था जिसकी बेटी की आंखों की रोशनी चली गई थी और चिकित्सकों ने भी उम्मीद छोड़ दी थी। परिवार ने माता के दरबार में प्रार्थना की, जिसके बाद धीरे-धीरे बच्ची की दृष्टि लौटने की बात सामने आई। सुदामा/ईएमएस 07 जून 2026