नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने टेस्ट क्रिकेट के भविष्य, युवा खिलाड़ियों की सोच और आधुनिक क्रिकेट की चुनौतियों पर खुलकर अपने विचार रखे हैं। अश्विन ने कहा कि युवा प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी को टेस्ट क्रिकेट जरूर खेलना चाहिए, लेकिन किसी खिलाड़ी पर इस प्रारूप को थोपना उचित नहीं होगा। अश्विन ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह मानते हैं कि वैभव सूर्यवंशी जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी को टेस्ट क्रिकेट में अपनी क्षमता आजमानी चाहिए क्योंकि यह खेल का सर्वोच्च प्रारूप है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी युवा खिलाड़ी को वह रास्ता अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जिसे वह स्वयं नहीं चुनना चाहता। उनके अनुसार आज का क्रिकेट माहौल और बदलती प्राथमिकताएं खिलाड़ियों की सोच को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर कोचिंग के दौरान उन्होंने शायद ही किसी युवा क्रिकेटर को रेड बॉल क्रिकेट खेलने की तीव्र इच्छा के साथ आते देखा हो। अधिकांश खिलाड़ी जल्दी से आक्रामक शॉट सीखना चाहते हैं और सीमित ओवरों के क्रिकेट की ओर आकर्षित होते हैं। टेस्ट क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए अश्विन ने कहा कि इस प्रारूप को समय के साथ विकसित होने की जरूरत है। उनका मानना है कि टेस्ट टीम में जगह बनाने का प्रमुख आधार प्रथम श्रेणी क्रिकेट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन कई उत्कृष्ट प्रथम श्रेणी खिलाड़ी अवसरों के अभाव में राष्ट्रीय टीम तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में सवाल यह है कि युवा खिलाड़ी वर्षों तक घरेलू क्रिकेट को समर्पित क्यों रहें, जब उन्हें पर्याप्त आर्थिक लाभ और अवसर नहीं मिलते। अश्विन के अनुसार टेस्ट क्रिकेट केवल भारत की नहीं बल्कि वैश्विक चुनौती बन चुका है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को लंबे दौरों, लगातार यात्रा, चार दिवसीय और पांच दिवसीय मैचों तथा शारीरिक दबाव का सामना करना पड़ता है, जबकि सीमित ओवरों के क्रिकेट में कम समय में अधिक कमाई की संभावना रहती है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि किसी रोमांचक टेस्ट मैच में जीत का जो संतोष मिलता है, उसकी तुलना किसी अन्य प्रारूप से नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि क्रिकेट प्रशासक वास्तव में टेस्ट क्रिकेट को मजबूत बनाना चाहते हैं तो युवा खिलाड़ियों को ऐसे कोचों के मार्गदर्शन में तैयार किया जाना चाहिए जो पारंपरिक क्रिकेट मूल्यों को महत्व देते हों। उनके अनुसार खेल की बुनियादी समझ और धैर्य विकसित करने में ऐसे प्रशिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। आधुनिक क्रिकेट में गेंदबाजों की चुनौतियों पर बात करते हुए अश्विन ने कहा कि आज के दौर में क्रिकेट पहले से कहीं अधिक तेज गति से बदल रहा है। टी20 क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव के कारण खेल अधिक हाई-स्कोरिंग हो गया है और गेंदबाजों को हर गेंद पर नई रणनीति के साथ उतरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अब केवल विकेट लेने की सोच पर्याप्त नहीं है, बल्कि गेंदबाजों को टीम रणनीति के तहत सामूहिक रूप से काम करना होगा। अश्विन ने माना कि क्रिकेट अब उस दौर में प्रवेश कर चुका है जहां बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को हर गेंद पर समस्या का समाधान तलाशना पड़ता है। उनके अनुसार जो खिलाड़ी इस मानसिकता को अपनाएंगे, वही भविष्य में खेल को नए स्तर तक ले जाएंगे। उनके विचारों से साफ है कि वह टेस्ट क्रिकेट को लेकर गंभीर हैं और चाहते हैं कि खेल का यह पारंपरिक प्रारूप बदलते समय के साथ खुद को मजबूत और प्रासंगिक बनाए रखे। डेविड/ईएमएस 07 जून 2026