क्षेत्रीय
07-Jun-2026
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- मुनि पुंगव सुधा सागरजी महाराज के सानिध्य में नसिंयाजी में होगा पात्रों का महाचयन दोपहर में इंदौर तो सोमवार को राजस्थान से उमड़ेगा श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब गुना (ईएमएस)। देश के धार्मिक इतिहास में पहली बार मध्य प्रदेश के गुना शहर में एक अनूठा और भव्य पंचमुखी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव आयोजित होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक महोत्सव के मुख्य पांच-पांच शीर्ष पात्रों के चयन की प्रक्रिया रविवार को संपन्न होगी। यह गौरवमयी कार्यक्रम प्रात: 8 बजे से बीजी रोड स्थित नसियांजी तीर्थ क्षेत्र में निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज के ससंघ पावन सानिध्य में एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैयाजी के निर्देशन में आयोजित किया जाएगा। जैन धर्म के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी पंचकल्याणक महोत्सव में भगवान के पांच माता-पिता के साथ-साथ पांच सौधर्म इंद्र, कुबेर, ईशान इंद्र और यज्ञनायक सहित अन्य सभी प्रमुख पात्रों की संख्या पांच-पांच होगी। इस अलौकिक और अनूठे चयन गवाह बनने के लिए गुना सहित संपूर्ण देश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु गुना पहुंच रहे हैं। इंदौर से आएगा श्रद्धालुओं का विशाल जत्था, चातुर्मास के लिए श्रीफल करेंगे भेंट महोत्सव को लेकर देशव्यापी उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार दोपहर तक इंदौर से करीब एक सैकड़ा से अधिक बसें और सैकड़ों निजी वाहनों के काफिले के साथ बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु मुनि पुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज के दर्शनार्थ गुना पहुंचेंगे। इंदौर गोधा स्टेट के सुप्रसिद्ध उद्योगपति मनीष गोधा के नेतृत्व में आने वाला श्रद्धालुओं का यह विशाल जत्था मुनि संघ के चरणों में इंदौर में आगामी चातुर्मास संपन्न करने के लिए सामूहिक रूप से श्रीफल भेंट कर मंगल प्रार्थना करेगा। इसी क्रम में, सोमवार को पड़ोसी राज्य राजस्थान से भी हजारों श्रद्धालुओं का गुना आगमन होगा। सोमवार को ही देश की सुप्रसिद्ध वंडर सीमेंट कंपनी एवं आरके मार्बल समूह के चेयरमैन भी मुनिश्री के दर्शन और महोत्सव की अगवानी के लिए विशेष रूप से गुना पहुंच रहे हैं। त्याग, संयम और कुलाचार की कसौटी पर परखकर ही बनेंगे भगवान के माता-पिता उल्लेखनीय है कि जैन परंपरा के अनुसार पंचकल्याणक महोत्सव में सबसे सम्मानित, पवित्र और सौभाग्यशाली पद भगवान के माता-पिता बनने का होता है। इस बारे में बजरंगगढ़ कमेटी अध्यक्ष इंजी. एसके जैन एवं महामंत्री प्रदीप जैन ने बताया कि सामान्यत: हर पंचकल्याणक में इन शीर्ष पात्रों की संख्या केवल एक-एक ही होती है, परंतु गुना के इस पंचमुखी पंचकल्याणक में यह संख्या पांच-पांच रहने वाली है। भगवान के माता-पिता का चयन किसी लौकिक मापदंड से नहीं, बल्कि पूरी तरह त्याग, संयम और तपस्या की कसौटी पर परखकर किया जाता है। इस गौरवशाली पद के लिए केवल उन्हीं श्रावकों को योग्य माना जाता है जिनका पारिवारिक बैकग्राउंड पूरी तरह धार्मिक रहा हो, जो स्वयं परम संयमी हों, शील-सदाचार के नियमों का पालन करने में सक्षम हों, देव-शास्त्र-गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा रखते हों, कुलाचार का दृढ़ता पूर्वक निर्वहन करते हों और किसी भी प्रकार के अंधविश्वास से दूर हों। इस पद की महत्ता और पवित्रता इतनी अधिक है कि भगवान के माता-पिता के रूप में चयनित होने वाले भाग्यशाली श्रावक-श्राविका को इस गौरवमयी महोत्सव के संपन्न होने के बाद आजीवन (जीवनभर) अनिवार्य रूप से पूर्ण ब्रह्मचर्य व्रत धारण करना होता है। पांच प्रमुख जैन मंदिरों का एक साथ होगा पंचकल्याणक, गौशाला मंदिर का विशेष इतिहास गुना शहर के अलग-अलग कोनों में होने जा रहे इस वृहद पंचमुखी पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत मुख्य रूप से पांच मंदिरों के पंचकल्याणक किया जाना है। इनमें बजरंगगढ़ स्थित पुण्योदय शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अलावा बीजी रोड नसियांजी मंदिर, शीतलधाम, छतरपुरिया स्टेट एवं एबी रोड स्थित गौशाला मंदिर शामिल हैं। बजरंगगढ़ तीर्थ के पश्चात इस पूरे आयोजन में सबसे प्रमुख मंदिर एबी रोड स्थित गौशाला मंदिर सर्वोदय ज्ञान तीर्थ क्षेत्र का माना जा रहा है, जिसकी संपूर्ण परिकल्पना और आधारशिला स्वयं मुनि पुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज ने आज से ठीक 13 वर्ष पूर्व गुना में आयोजित अपने ऐतिहासिक चातुर्मास के दौरान रखी थी। 76 फुट की ऊंचाई से डेढ़ किलोमीटर दूर से ही दिखाई देगी भगवान बाहुबली की विशाल प्रतिमा एबी रोड स्थित इस नवनिर्मित मुख्य मंदिर परिसर में 40 फुट की एक भव्य गुफा का निर्माण किया गया है। इस 40 फुट ऊंची गुफा के ठीक ऊपर खुले आकाश तले 5 फुट ऊंचे कमलासन पर भगवान बाहुबली की 31 फुट की खड्गासन (खड़ी) विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। इस प्रकार जमीन के तल से लेकर प्रतिमा के शीर्ष तक इसकी कुल ऊंचाई लगभग 76 फुट हो जाती है। राजस्थान के सुप्रसिद्ध बिजौलिया के विशेष लाल पाषाण (पत्थर) से तराशी गई भगवान बाहुबली की यह अनुपम प्रतिमा इतनी विशाल और विहंगम है कि गुना शहर की दिशा से आने वाले राहगीरों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर से ही इसके भव्य दर्शन होने लगते हैं, जबकि रुठियाई-इंदौर मार्ग की दिशा से पीछे से भी यह प्रतिमा 500 मीटर की दूरी से स्पष्ट दिखाई देती है। वहीं, इस मंदिर के नीचे बनी सुरम्य गुफा में भगवान आदिनाथ की लगभग 8 फीट ऊंची अलौकिक पद्मासन प्रतिमा विराजमान की गई है। भगवान आदिनाथ एवं उनके ज्येष्ठ पुत्र भगवान बाहुबली के इस वैभवशाली मंदिर और इन पाषाण प्रतिमाओं को स्थापित करने वाले पुण्यार्जक परिवार होने का गौरव बांझल खुटियावद परिवार को प्राप्त हुआ है। 20 बीघा में फैला सर्वोदय ज्ञान तीर्थ क्षेत्र, संचालित हो रही गौशाला और संत सुधा सागर स्कूल प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में इस संपूर्ण भूमि पर सर्वोदय ज्ञान तीर्थ क्षेत्र की स्थापना मुनिश्री सुधा सागरजी महाराज के मंगल आशीर्वाद और उनके प्रत्यक्ष दिशा-निर्देशन में की गई है। लगभग 20 बीघा के विशाल क्षेत्रफल में फैले इस पावन तीर्थ क्षेत्र पर वर्तमान में एक आदर्श गौशाला संचालित हो रही है, जिसमें वर्तमान में 100 से अधिक गोवंश की पूर्ण श्रद्धा के साथ सेवा-सुश्रूषा की जा रही है। इसके साथ ही, यहाँ संत सुधा सागर पब्लिक स्कूल का भी सुचारू संचालन किया जा रहा है, जहाँ कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक संस्कार दिए जा रहे हैं। आगामी समय में इस तीर्थ क्षेत्र पर अध्ययन करने वाले दूर-दराज के बच्चों के लिए एक सर्वसुविधायुक्त हॉस्टल (छात्रवास) का प्रावधान भी रखा गया है, जो बहुत जल्द ही मूर्त रूप लेने जा रहा है। इसके अतिरिक्त, देश-विदेश से आने वाले तीर्थ यात्रियों के सर्वसुविधायुक्त ठहराव के लिए यहाँ एक अत्याधुनिक धर्मशाला का निर्माण भी पूर्ण किया जा चुका है, जिसमें वर्तमान में 6 सर्वसुविधायुक्त कमरे और एक विशाल हॉल निर्मित है। इस विशाल तीर्थ क्षेत्र और गौशाला के ऐतिहासिक इतिहास को रेखांकित करते हुए समाज के वरिष्ठों ने बताया कि लगभग 26 वर्ष पूर्व पूज्य स्व. केशरीमल जैन (जैन ज्वैलर्स परिवार, गुना) द्वारा इस पवित्र गौशाला की स्थापना के लिए यह बहुमूल्य भूमि दान स्वरूप समर्पित की गई थी, जो आज मुनिश्री के आशीर्वाद से एक महान धार्मिक और सामाजिक केंद्र के रूप में देश के पटल पर अपनी पहचान स्थापित कर चुकी है। पंचकल्याणक की तैयारियों के बीच मुनिश्री से आशीर्वाद लेने पहुंचे कलेक्टर, व्यवस्थाओं के लिए दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा ऐतिहासिक पंचमुखी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव की व्यापक तैयारियों के बीच शनिवार को कलेक्टर किशोर कन्याल ने जिला प्रशासनिक अमले के साथ बीजी रोड स्थित नसियांजी तीर्थ क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान कलेक्टर ने निर्यापक मुनि पुंगव सुधा सागरजी महाराज के दर्शन कर उनका पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर कलेक्टर के साथ एसडीएम शिवानी पांडे, स्थानीय तहसीलदार और जनसंपर्क अधिकारी एसके शर्मा सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। मुनिश्री से चर्चा के दौरान कलेक्टर श्री कन्याल ने इस भव्य राष्ट्रीय महोत्सव के सफल और सुचारू आयोजन हेतु जिला प्रशासन की ओर से की जा रही व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि यातायात, सुरक्षा, पेयजल और अन्य सभी आवश्यक तैयारियों के लिए प्रशासन हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके पूर्व गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने भी अपने जन्मदिन पर नसियांजी पहुंचकर मुनिश्री के समक्ष श्रीफल भेंढ कर आशीर्वाद लिया। - सीताराम नाटानी