- यूपी-ओडिशा पुलिस के ज्वाइंट ऑपरेशन में दूसरा मुख्य आरोपी गिरफ्तार - चंगुल से भागकर पीड़िता ने बयां की खौफनाक दास्तां - एनएचआरसी ने दोनों राज्यों के डीजीपी से मांगी रिपोर्ट अनुगुल (ईएमएस)। ओडिशा के ढेंकानाल जिले की एक 17 वर्षीय आदिवासी किशोरी को नौकरी का झांसा देकर अगवा करने और उत्तर प्रदेश के झांसी में ले जाकर बेचने के सनसनीखेज मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। ओडिशा और उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष टीमों ने एक संयुक्त अभियान चलाकर झांसी से दूसरे मुख्य आरोपी चंद्रपाल कुशवाहा (26 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर ओडिशा लाने के बाद शनिवार को अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इससे पहले मानव तस्करी गिरोह के सरगना विनय पात्रा (46 वर्ष) को बीती 30 मई को विशाखापट्टनम से गिरफ्तार किया जा चुका है। यह खौफनाक दास्तां साल 2024 में शुरू हुई थी, जब पीड़िता परिवार की बदहाली के कारण काम की तलाश में थी। आरोपी विनय पात्रा ने उसे भुवनेश्वर में नौकरी दिलाने के बहाने अगवा किया और सीधे झांसी ले जाकर आशीष यादव नामक शख्स को सौंप दिया। पीड़िता की शिकायत के मुताबिक, आशीष और उसके पिता कल्याण यादव ने उसे तीन महीने तक बंधक बनाकर रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान जब वह गर्भवती हो गई, तो आशीष की मां उर्मिला यादव ने उसका जबरन गर्भपात करा दिया। इसके बाद आशीष ने पीड़िता को 50 हजार रुपये में चंद्रपाल कुशवाहा को बेच दिया। चंद्रपाल के घर पर पीड़िता की जिंदगी और भी नर्क बन गई। वहाँ चंद्रपाल, उसके बड़े भाई और दो चाचाओं ने उसे दो साल तक कड़े पहरे में बंधक बनाकर रखा और लगातार सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया। बीती 19 मई को पीड़िता किसी तरह उनके चंगुल से भाग निकली और झांसी के एक स्थानीय वकील की मदद से 22 मई को ओडिशा वापस लौट सकी। पीड़िता ने 23 मई को कामाख्यानगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई। इस झकझोर देने वाले मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने ओडिशा और उत्तर प्रदेश के डीजीपी सहित ढेंकानाल के जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट, पीड़िता के मुआवजे और पुनर्वास की जानकारी मांगी है। कामाख्यानगर थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार मल्लिक ने बताया कि मामले के अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। - ईएमएस 07 जून 2026