07-Jun-2026
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-सुरक्षा एजेंसियों के बीच चिंता बढ़ी, दोनों देशों के रिश्तों में तनाव के संकेत वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका और इजराइल की दोस्ती दुनिया से छिपी नहीं है। गाजा अटैक के वक्त इजराइल की कार्रवाई का अमेरिका ने समर्थन किया था, जबकि ईरान युद्ध में दोनों ने मिलकर ईरान पर हमला किया। हालांकि लेबनान के मामले में अब दोनों देशों के बीच विवाद चल रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध से निकलने के लिए चाह रहे हैं कि लेबनान-इजराइल के बीच शांति बने, लेकिन नेतन्याहू इसके लिए तैयार नहीं हैं। अब एक नया विवाद जन्म लेता दिख रहा है। जब अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजराइल ही अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी कर रहा है। आखिर वो ऐसा कर क्यों रहा है और कौन उनके निशाने पर है? रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी कर रहा है और इसके बाद हड़कंप मचा हुआ है। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है, वो भी ऐसे वक्त में, जब पहले ही ट्रंप और नेतन्याहू के बीच लेबनान को लेकर तीखी बहस हो चुकी है। इन रिपोर्टों के बाद अमेरिका में सुरक्षा एजेंसियों के बीच चिंता बढ़ गई है और दोनों देशों के रिश्तों में तनाव के संकेत नजर आ रहे हैं। वैसे इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद इस तरह के हथकंडों का बखूबी इस्तेमाल करके जासूसी करती है, जिसके उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं। रिपोर्ट बताती हैं कि अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने इजराइल से जुड़े जासूसी खतरे के स्तर को बढ़ाकर सबसे ऊंचे क्रिटिकल स्तर पर पहुंचा दिया है। इसका मतलब है कि अमेरिकी एजेंसियां इस खतरे को बहुत गंभीर मान रही हैं। हालांकि इजराइल ने इन आरोपों से इनकार किया है। बताया जा रहा है कि इजराइल ने ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारी एल्ब्रिज कोल्बी और उनके सहयोगी माइकल डीमिनो समेत कई बड़े अधिकारियों की गतिविधियों और बातचीत पर नजर रख रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजराइल ट्रंप प्रशासन की रणनीति और ईरान के साथ बातचीत को लेकर बदलते रुख की जानकारी हासिल करना चाहता है। अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी और अन्य सैन्य खुफिया इकाइयों की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के हफ्तों में इजराइल की जासूसी गतिविधियां बढ़ी हैं। रिपोर्ट में अमेरिकी सैन्य कर्मियों और सरकारी अधिकारियों की निगरानी का भी जिक्र किया गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इजराइल में तैनात कुछ अमेरिकी रक्षा कर्मियों को पता चला कि उनके मोबाइल फोन में उनकी बातचीत सुनने वाला सॉफ्टवेयर गुप्त रूप से डाला गया था। इसी वजह से कई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी इजराइल यात्रा के दौरान अस्थायी या विशेष फोन का इस्तेमाल करते हैं। बता दें इस वक्त ट्रंप और नेतन्याहू के बीच ईरान युद्ध और लेबनान में सैन्य अभियानों को लेकर अलग-अलग राय रही है। ऐसे में नई खुफिया चेतावनियां दोनों देशों के सैन्य सहयोग को प्रभावित कर सकती हैं। माना जा रहा है कि पेंटागन भविष्य में इजराइल के साथ साझा की जाने वाली कुछ संवेदनशील जानकारियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगा सकता है। हालांकि अमेरिका और इजराइल के बीच जासूसी के आरोप कोई नई बात नहीं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 के अंत से ऐसी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई। सिराज/ईएमएस 07जून26