क्षेत्रीय
07-Jun-2026
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- बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती; मची खलबली ​गुना (ईएमएस)। शहर के बूढ़े बालाजी और पुरानी छावनी क्षेत्र में इन दिनों दूषित पानी की सप्लाई मासूम बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। पिछले तीन-चार दिनों से क्षेत्र में गंदा और संक्रामक पानी आने के कारण एक दर्जन से अधिक घरों के लगभग डेढ़ दर्जन (15 से अधिक) बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं। बीमार बच्चों को लगातार उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमले और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया, जिसके बाद आनन-फानन में अधिकारी स्थिति का जायजा लेने अस्पताल पहुंचे। ​पार्षद प्रतिनिधि ने अस्पताल पहुंचकर जाना हाल, टूटी पाइपलाइनों पर उठाए सवाल ​मामले की गंभीरता को देखते हुए वार्ड के पार्षद प्रतिनिधि लालाराम लोधा तुरंत प्रभावित क्षेत्र और जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्हें बच्चों के बीमार होने की सूचना मिली, वे बूढ़े बालाजी क्षेत्र की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि कई बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती हैं। ​जब पार्षद प्रतिनिधि जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड पहुंचे, तो स्थिति काफी चिंताजनक थी। वहां पुरानी छावनी और बूढ़े बालाजी क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक बच्चे इलाजरत मिले। लालाराम लोधा ने कहा, क्षेत्र में लंबे समय से दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। देखने में भले ही पानी सफेद और साफ नजर आ रहा हो, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक वह अंदरूनी रूप से बैक्टीरिया युक्त और दूषित है। उन्होंने जनस्वास्थ्य विभाग (PHE) के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी कई बार पीएचई के जिम्मेदारों से क्षेत्र में टूटी पड़ी पाइपलाइनों को दुरुस्त करने की मांग की थी। इन्हीं टूटी पाइपलाइनों के जरिए नालियों का गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है। पानी की टंकी की सफाई के सवाल पर उन्होंने बताया कि अधिकारियों से चर्चा के अनुसार करीब 4 महीने पहले टंकी साफ की गई थी, लेकिन असली समस्या टूटी हुई वितरण पाइपलाइनें हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम से वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत करा दिया है। ​पीड़ितों की आपबीती: प्राइवेट इलाज में आराम नहीं मिला, लैट्रिन से आ रहा खून ​अस्पताल में अपने बच्चों का इलाज करा रही स्थानीय महिलाओं ने क्षेत्र की बदहाल जलापूर्ति को लेकर भारी नाराजगी जाहिर की। पीड़ित महिला राधा बाई ने बताया कि उनका बच्चा पिछले 3 दिनों से अस्पताल में भर्ती है। इससे पहले उन्होंने निजी डॉक्टर से भी इलाज कराया, लेकिन जब बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और स्थिति बिगड़ने लगी, तो उन्होंने उसे जिला अस्पताल में दाखिल कराया। राधा बाई के अनुसार, क्षेत्र में लंबे समय से गंदा पानी आ रहा है, जिसकी शिकायत उन्होंने पार्षद से भी की थी। ​वहीं, क्षेत्र की निवासी रानी जोगी ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि उनके बच्चे को पिछले तीन-चार दिनों से पेट में तेज दर्द और दस्त की शिकायत थी। स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि बच्चे को लैट्रिन के साथ खून भी आने लगा था। निजी अस्पताल में आराम न मिलने पर अब उसे जिला अस्पताल लाया गया है, जहां डॉक्टरों ने साफ तौर पर कहा है कि यह बीमारी दूषित पानी पीने की वजह से ही फैली है। एक अन्य स्थानीय निवासी सकीना बानो ने बताया कि उनकी नातिन भी पिछले दो दिनों से लगातार हो रही उल्टी-दस्त के कारण अस्पताल में जिंदगी और बीमारी से जूझ रही है। ​अस्पताल पहुंचे अधिकारी, जांच और सुधार के निर्देश ​जैसे ही एक ही इलाके से इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने की खबर प्रशासन तक पहुंची, स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका के वरिष्ठ अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने बीमार बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और डॉक्टरों को बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, पीएचई और नपा की तकनीकी टीम को प्रभावित क्षेत्र में भेजकर पानी के सैंपल लेने और टूटी हुई पाइपलाइनों को तत्काल चिन्हित कर उन्हें ठीक करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके। फिलहाल, अस्पताल में बच्चों का इलाज जारी है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। - सीताराम नाटानी