- पीछे छोड़ गए सिनेमा की एक चलती-फिरती पाठशाला - दिग्गज फिल्मकार भारतीराजा का 84 वर्ष की उम्र में निधन - तमिल सिनेमा के एक स्वर्णिम युग का अंत चेन्नई (ईएमएस)। तमिल सिनेमा जगत को आज एक अपूरणीय क्षति हुई है। भारतीय सिनेमा में यथार्थवाद की नई धारा की शुरुआत करने वाले दिग्गज फिल्मकार, पटकथा लेखक और बेजोड़ निर्देशक भारतीराजा का बुधवार को चेन्नई में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। उनके महाप्रयाण की खबर मिलते ही पूरे तमिल फिल्म उद्योग, कला जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीराजा पिछले काफी समय से बढ़ती उम्र की बीमारियों और गंभीर श्वसन संबंधी (सांस लेने में तकलीफ) समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें फेफड़ों में संक्रमण के चलते चेन्नई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। हालांकि, उनके परिवार की ओर से मृत्यु के सटीक कारणों को लेकर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान साझा नहीं किया गया है। गौरतलब है कि पिछले साल भी उन्हें सांस की गंभीर बीमारी के बाद अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया था, जहां से वे ठीक होकर लौट आए थे, लेकिन उनका स्वास्थ्य लगातार नाजुक बना हुआ था। इसके अलावा, पिछले वर्ष उनके 48 वर्षीय बेटे मनोज भारतीराजा का अचानक दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया था, जिसके बाद से वे गहरे सदमे और मानसिक अवसाद में थे। साल 1941 में जन्मे भारतीराजा को तमिल सिनेमा में एक क्रांतिकारी फिल्मकार माना जाता है, जिन्होंने फिल्मों को चारदीवारी और भव्य स्टूडियो के सेट से बाहर निकालकर वास्तविक गांवों की मिट्टी, खेतों और आम इंसानों की जिंदगी से जोड़ा। साल 1977 में आई उनकी कल्ट क्लासिक पहली फिल्म 16 वायथिनिले को तमिल सिनेमा के इतिहास का मील का पत्थर माना जाता है, जिसने उस दौर में फिल्म निर्माण की पूरी परिभाषा ही बदल दी थी। अपने पांच दशक से भी लंबे और शानदार फिल्मी सफर में उन्होंने सिगप्पु रोजाक्कल, मुधल मरियाधाई, वेदम पुधिथु और किझक्कु चीमायिले जैसी एक से बढ़कर एक कालजयी फिल्मों का निर्देशन किया। वे केवल एक बेहतरीन निर्देशक ही नहीं थे, बल्कि उन्हें सिनेमा का पारखी माना जाता था, जिन्होंने रजनीकांत, कमल हासन और कई नवागंतुकों को अपने किरदारों के जरिए तमिल सिनेमा के शीर्ष सितारों में तब्दील कर दिया। भारतीय सिनेमा में उनके इस अभूतपूर्व और अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान और कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से नवाजा था। उनके निधन पर फिल्म जगत की मशहूर अभिनेत्री और भाजपा नेत्री खुशबू सुंदर ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीराजा अपने पीछे एक ऐसी समृद्ध विरासत छोड़ गए हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए फिल्म निर्माण की एक चलती-फिरती पाठशाला की तरह काम करेगी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनके निर्देशन में काम करने का उनका एक पुराना सपना अब हमेशा के लिए अधूरा रह गया। भारतीराजा का जाना न केवल तमिल बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम अध्याय का अंत है। रामयश/ईएमएस 10 जून 2026