राज्य
10-Jun-2026


- पंचायत सिविल कोर्ट नहीं जो मालिकाना हक की जांच करे: हाईकोर्ट जबलपुर(इएमएस)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी संपत्ति के पंजीयन (रजिस्ट्री) के मामले में सब-रजिस्ट्रार के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले पुलिस को यह तय करना होगा कि संबंधित अधिकारी की भूमिका क्या थी और क्या उसने जानबूझकर किसी अनियमितता में भागीदारी की है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पंचायत या पंजीयन अधिकारी का काम दस्तावेजों की औपचारिक जांच करना है, न कि किसी संपत्ति के मालिकाना हक का निर्णय करना। मालिकाना हक से जुड़े विवादों का निपटारा सिविल अदालतों के अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय ने कहा कि केवल रजिस्ट्री होने के आधार पर किसी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया जा सकता। फैसले को पंजीयन विभाग के अधिकारियों के लिए राहत और संपत्ति विवादों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन माना जा रहा है। नंदिनी पारसी \ १० मई २०२६