राज्य
10-Jun-2026


भोपाल (इएमएस)। मध्यप्रदेश में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए लागू स्लैब आधारित बिलिंग व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। उपभोक्ताओं का कहना है कि निर्धारित सीमा से मात्र एक यूनिट अधिक बिजली खर्च होने पर पूरे बिल पर ऊंची दरें लागू हो जाती हैं, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। जानकारी के अनुसार 150 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम दर पर बिल मिलता है, लेकिन खपत 151 यूनिट होते ही बिल में बड़ा अंतर आ जाता है। ऐसे में सिर्फ एक यूनिट अधिक खपत कई बार सैकड़ों रुपये का अतिरिक्त भार डाल देती है। इसे लेकर उपभोक्ता संगठनों ने भी आपत्ति जताई है और स्लैब व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है। बिजली कंपनियों का तर्क है कि स्लैब प्रणाली ऊर्जा बचत को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है, जबकि उपभोक्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था कई बार उनके लिए दंडात्मक साबित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर और नियमित निगरानी से खपत नियंत्रित की जा सकती है, लेकिन स्लैब के कारण बढ़ने वाले बिलों पर व्यापक चर्चा और सुधार की जरूरत है। नंदिनी पारसी \ १० मई २०२६