10-Jun-2026
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- सहायक आयुक्त 2.5 लाख रुपये की घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार भिवंडी, (ईएमएस)। भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। ठाणे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने महापालिका के प्रभारी सहायक आयुक्त को 2.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद महापालिका प्रशासन में हड़कंप मच गया है और एक बार फिर नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, भिवंडी महानगरपालिका में सर्वेयर एवं भवन निरीक्षक के पद पर कार्यरत सुरेंद्र भोईर वर्तमान में प्रभारी सहायक आयुक्त की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। आरोप है कि प्रभाग समिति क्रमांक-3 के क्षेत्र में चल रहे एक कथित अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करने के बदले उन्होंने संबंधित व्यक्ति से 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। भोईर ने शिकायतकर्ता से कहा था कि कुल राशि में से पहली किस्त के रूप में 2 लाख 50 हजार रुपये तत्काल दिए जाएं। रिश्वत की मांग से परेशान शिकायतकर्ता ने इस संबंध में ठाणे एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क किया और लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद एसीबी अधिकारियों ने मामले की जांच की और रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर जाल बिछाया। मंगलवार शाम करीब 7 बजे सुरेंद्र भोईर प्रभाग समिति कार्यालय के बाहर एक खुले मैदान में अपनी हुंडई क्रेटा कार में बैठे हुए थे। इसी दौरान शिकायतकर्ता तय योजना के अनुसार 2.5 लाख रुपये लेकर वहां पहुंचा। जैसे ही शिकायतकर्ता ने रिश्वत की रकम भोईर को सौंपी और उन्होंने पैसे स्वीकार किए, पहले से निगरानी कर रही एसीबी टीम ने उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद सुरेंद्र भोईर को शहर पुलिस थाने ले जाया गया, जहां देर रात तक उनसे पूछताछ की गई और उनका बयान दर्ज किया गया। इसके बाद तड़के उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। एसीबी की इस कार्रवाई से भिवंडी महापालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मच गई है। मामले की आगे की जांच जारी है। - तीन वर्षों में भ्रष्टाचार के कई मामले सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के दौरान भिवंडी महापालिका में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग द्वारा की गई चार अलग-अलग कार्रवाइयों में सात कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बावजूद भ्रष्टाचार के मामलों में कमी नहीं आई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि रिश्वतखोरी के मामलों में गिरफ्तार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई और निलंबन होना चाहिए। साथ ही ऐसे कर्मचारियों को दोबारा जिम्मेदारी वाले पदों पर नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। - प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल आलोचकों का आरोप है कि भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े गए अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति प्रशासन अक्सर नरम रुख अपनाता है। यही कारण है कि बार-बार कार्रवाई होने के बावजूद व्यवस्था में सुधार दिखाई नहीं देता। भिवंडी महापालिका में सामने आए इस ताजा मामले ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी को उजागर कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की जाती है और क्या इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। - १० जून/२०२६/ईएमएस