मुंबई (ईएमएस)। बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए एक बेहद भावुक और हृदयस्पर्शी किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि जब वे बहुत छोटी थीं, तभी से उनके मन में यह गहरा सपना था कि वे जीवन में कुछ बहुत बड़ा करें, ताकि अपने मम्मी-पापा को हर खुशी और ऐशो-आराम दे सकें, जिनकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। रानी मुखर्जी इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने एक पुराने इंटरव्यू के कारण चर्चा में हैं। इस इंटरव्यू में रानी ने खुलासा किया कि बचपन में जब भी वे किसी दुकान पर जाती थीं और उनका मन किसी खिलौने या किसी अन्य चीज को खरीदने का करता था, तो उनकी पहली प्रतिक्रिया अपनी मां के चेहरे को देखना होती थी। अगर उन्हें जरा भी यह अंदाजा होता था कि उनकी मां के पास उस वक्त उतने पैसे नहीं हैं या वे उसे खरीदने में असमर्थ होंगी, तो रानी चुपचाप अपनी इच्छाओं का दमन कर लेती थीं। वे कभी भी रोने-धोने या जिद करने का नाटक नहीं करती थीं, बल्कि अपनी भावनाओं को अंदर ही दबा लेती थीं। रानी ने बड़ी ही सरलता से यह भी बताया कि वे बचपन से ही अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना में कहीं अधिक समझदार थीं। जहां सामान्यतः बच्चे सिर्फ अपनी फरमाइशों और खिलौनों के बारे में सोचते हैं, वहीं रानी बहुत छोटी उम्र में ही अपने घर की परिस्थितियों, पैसों की तंगी और अपने माता-पिता की भावनाओं को गहराई से समझने लगी थीं। वे अपनी मां को किसी भी तरह के तनाव या मुश्किल में नहीं देखना चाहती थीं, इसलिए अपनी इच्छाओं को दबाकर उनके चेहरे पर मुस्कान बनाए रखने का प्रयास करती थीं। वे मन ही मन खुद से यह वादा करती थीं कि एक दिन वे इतनी कामयाब और अमीर बनेंगी कि उन्हें किसी भी चीज को खरीदने से पहले सोचना न पड़े और वे अपने माता-पिता की हर अधूरी ख्वाहिश को चुटकियों में पूरा कर सकें। उनके सपनों की उड़ान हमेशा उनके परिवार की खुशियों से ही शुरू होती थी। रानी के पिता राम मुखर्जी एक फिल्म निर्देशक थे और मां कृष्णा मुखर्जी एक प्लेबैक सिंगर थीं, इसलिए घर में सिनेमा का माहौल तो था ही, जिसने रानी को बहुत कम उम्र में ही अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। रानी मुखर्जी ने आगे चलकर अपनी इसी समझदारी, कड़ी मेहनत और लगन के दम पर बॉलीवुड में कदम रखा और एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। सुदामा/ईएमएस 11 जून 2026