11-Jun-2026
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-धार्मिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से दोनों देशों के बीच आपसी संबंध मजबूत बनेंगे अमृतसर,(ईएमएस)। भारत-पाकिस्तान की साझा सिख विरासत और धार्मिक श्रद्धा का एक अनूठा संगम देखने को मिला है। प्रथम पातशाही श्री गुरु नानक देवजी के पावन जन्मस्थान गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब जो पाकिस्तान में वहां भारत से एक बेहद खूबसूरत गोल्डन फाइबर पालकी साहिब भेजी गई है। बुधवार को इसे अमृतसर के अटारी-वाघा सीमा मार्ग के जरिए पूरे धार्मिक आदर-सत्कार के साथ पाकिस्तान रवाना किया गया। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के निवासी भाई महेश सिंह ने इस पालकी साहिब को तैयार करने का विशेष अनुरोध किया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस सुंदर पालकी साहिब को गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब में स्थापित किया जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इसके दर्शन कर सकें। पालकी साहिब को सीमा पार भेजने के लिए भारतीय सुरक्षा और प्रशासनिक महकमे ने मुस्तैदी दिखाई। भारतीय कस्टम विभाग के कमिश्नर ए पी चौधरी, सुपरिंटेंडेंट अशोक कुमार और सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों ने सभी जरूरी और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं। कागजी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद भारतीय कस्टम अधिकारियों ने पालकी साहिब को पाकिस्तान कस्टम विभाग के सुपुर्द किया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के जत्था लीडर भाई भूपिंदर सिंह भलवान ने बताया कि वाघा सीमा पर पाकिस्तान के सिख नेता रमेश सिंह अरोड़ा और महेश सिंह के सहयोगियों को यह पालकी साहिब औपचारिक रूप से सौंप दी जाएगी। दोनों देशों के धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने इस पवित्र पहल का दिल से स्वागत किया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह कदम गुरु नानक देव जी की मूल शिक्षाओं प्रेम, आपसी भाईचारे और मानव सेवा का एक जीवंत प्रतीक है। इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से दोनों देशों के बीच आपसी संबंध और ज्यादा मजबूत व सौहार्दपूर्ण बनते हैं। सिराज/ईएमएस 11जून26 ----------------------------