11-Jun-2026
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-सयानी घोष ममता और अभिषेक दोनों की करीबी नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अंदर इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। ममता की पार्टी के अंदर सुलग रही सियासी बगावत की आग अब खुलकर सामने आ गई है, जहाँ टीएमसी के विधायक के बाद सांसद भी बागी हो रहे हैं। टीएमसी के उन 19 बागी सांसदों की एक सूची सामने आई है, जिन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए को समर्थन देने और काकोली घोष को अपना नेता घोषित किया है। इस बागी सूची में सयानी घोष, शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे तीन बड़े और ग्लैमरस चेहरों के नाम भी शामिल हैं। सूची सामने आने के 24 घंटे से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी ये तीनों नेता पूरी तरह खामोश हैं। न उनकी तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही सोशल मीडिया पर कोई सफाई दी गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार बेहद गर्म है। अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर आसनसोल सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का 24 घंटे तक चुप रहना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। राजनीति के पुराने खिलाड़ी शत्रुघ्न सिन्हा ने अमूमन इसतरह के मामलों में तुरंत मीडिया के सामने आकर खंडन किया होता, लेकिन उनकी खामोशी यह संकेत देती है कि वे फिलहाल वेट एंड वॉच के मोड में हैं। मार्च 2022 में टीएमसी में शामिल हुए और ममता बनर्जी द्वारा गैर-बंगाली होने के बावजूद दिए गए सम्मान के बाद उनका बागी गुट में नाम आना पार्टी के लिए चिंता का कारण है। बहरामपुर से टीएमसी सांसद बने पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान भी पूरी तरह मौन हैं। ममता बनर्जी ने उन्हें सियासत में लाकर एक बड़े धर्मनिरपेक्ष चेहरे के रूप में दिखाया था। इसके बाद बागी लिस्ट में उनका नाम होना और उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया न आने से टीएमसी नेतृत्व के माथे पर शिकन साफ दिख रही है। लेकिन इन बागी सांसदों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम सयानी घोष का है। टीएमसी की युवा विंग की बड़ी नेता रहीं सयानी को ममता और अभिषेक बनर्जी का बेहद करीबी कहा जाता है। हर मुद्दे पर पार्टी का पक्ष आक्रामक तरीके से सोशल मीडिया और टीवी डिबेट में रखने वाली सयानी की चुप्पी बताती है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। ममता और अभिषेक बनर्जी भी सयानी के इस बदलाव को लेकर बेचैन हैं। सत्ता गंवाने के बाद पार्टी पहले से ही बिखराव के दौर से गुजर रही है, इसके बाद सयानी का बागी गुट के साथ जाना उनकी चिंताएं और बढ़ा रहा है। वहीं टीएमसी की तरफ से डैमेज कंट्रोल की कोशिशें जारी हैं। सांसद कीर्ति आजाद ने बताया कि उन्होंने सयानी घोष से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। सयानी की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलना यह दर्शाता है कि बगावत की जड़ें अनुमान से कहीं ज्यादा गहरी हैं। आशीष दुबे / 11 जून 2026