मनोरंजन
12-Jun-2026
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मुंबई (ईएमएस)। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की आईपीएल 2026 के फाइनल में शानदार जीत के जश्न के दौरान अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने अपनी तुलसी की कंठी माला से सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी यह सार्वजनिक उपस्थिति एक बार फिर सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं और प्रतीकों को लेकर चर्चा का विषय बन गई है। अपने पति विराट कोहली के साथ मैदान पर दिखी अनुष्का की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं, जिसके बाद कई लोग तुलसी की माला के धार्मिक महत्व और उसे धारण करने के नियमों के बारे में जानने को उत्सुक हो गए हैं। सनातन धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी का सीधा संबंध भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण से है, जिन्हें वैष्णव परंपरा में सर्वोपरि माना जाता है। यही वजह है कि तुलसी की माला धारण करना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। यह माला धारण करने वाला व्यक्ति स्वयं को ईश्वरीय शक्ति से जुड़ा हुआ महसूस करता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमों के साथ तुलसी की कंठी माला धारण करता है, उस पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की विशेष कृपा बनी रहती है, जिससे उसके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार तुलसी की माला मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। पहली रामा तुलसी माला, जिसे रामा तुलसी के पौधे की लकड़ी से तैयार किया जाता है। इसका रंग अपेक्षाकृत हल्का होता है और इसे शांति, सकारात्मकता तथा मन की एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है। दूसरी श्यामा तुलसी माला, जो श्यामा तुलसी से बनी होती है और जिसका रंग थोड़ा गहरा होता है। वैष्णव परंपरा में इसे विशेष महत्व दिया जाता है और इसे भगवान कृष्ण की भक्ति से सीधे जोड़ा जाता है। भक्त इसे भगवान कृष्ण के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा के प्रतीक के रूप में धारण करते हैं। तुलसी की माला धारण करने से कई आध्यात्मिक लाभ बताए गए हैं। मान्यता है कि यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और भय, चिंता तथा नकारात्मक विचारों को दूर करने में सहायक होती है। यह मन में शांति बनाए रखने और ईश्वर के प्रति आस्था को मजबूत करने में भी मददगार मानी जाती है, जिससे ध्यान और एकाग्रता में सुधार महसूस किया जा सकता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तुलसी की माला को मानसिक शांति और सकारात्मक सोच के विकास का एक माध्यम भी माना जाता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से भी तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर पौधा माना गया है, हालांकि माला पहनने से सीधे स्वास्थ्य लाभों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। तुलसी की माला धारण करने के कुछ विशेष नियम हैं, जिनका पालन करना इसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। इसे धारण करने से पहले गंगाजल से शुद्ध करना शुभ माना जाता है, जिससे यह माला और भी पवित्र हो जाती है। सोमवार, गुरुवार, एकादशी या पूर्णिमा जैसे विशेष दिनों में इसे धारण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है, क्योंकि ये दिन धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। इस माला को धारण करने वाले व्यक्ति को सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है, जिसमें मांसाहार, नशा और गलत आचरण से दूर रहना शामिल है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, शौच जाने, अंतिम संस्कार में शामिल होने या वैवाहिक संबंध बनाने से पहले तुलसी की माला उतार देना उचित माना जाता है, ताकि इसकी पवित्रता खंडित न हो। साथ ही, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी की माला को अन्य धातु की मालाओं के साथ पहनने से बचना चाहिए, इसे अलग और सम्मानपूर्वक धारण करना चाहिए। अनुष्का शर्मा की तस्वीरों के बाद भले ही तुलसी की कंठी माला की चर्चा फिर से तेज हो गई हो, लेकिन सनातन परंपरा में इसका महत्व सदियों से बना हुआ है। सुदामा/ईएमएस 12 जून 2026