राष्ट्रीय
12-Jun-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने शुक्रवार को सड़क मार्ग से बांग्लादेश में प्रवेश कर औपचारिक रूप से अपना राजनयिक कार्य शुरू किया है। बेनापोल-पेट्रापोल सीमा बिंदु से उनके आगमन ने दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। आमतौर पर महत्वपूर्ण राजनयिक पदों पर करियर डिप्लोमैट्स को नियुक्त होता है, लेकिन भारत सरकार ने बांग्लादेश के लिए एक अनुभवी राजनेता दिनेश त्रिवेदी को ढाका में अपना दूत नियुक्त कर इस परंपरा को तोड़ा है। यह कदम दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई दिशा देने की उम्मीद जगा रहा है। इस असाधारण चयन के पीछे कई रणनीतिक कारण सामने आ रहे हैं। 75 वर्षीय त्रिवेदी न केवल बांग्लाभाषी हैं बल्कि उन्हें बंगाल और बांग्लादेश की संस्कृति और राजनीतिक समझ भी गहरी है। अधिकारियों का मानना है कि एक राजनेता के रूप में उनकी क्षमता, जो नियमों के बजाय परिस्थितियों के अनुसार संवाद करने में सक्षम होते हैं, मौजूदा संबंधों को और अधिक लचीलापन और मजबूती प्रदान करेगी। यह खासकर तब महत्वपूर्ण है जब भारत और बांग्लादेश कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में त्रिवेदी का लंबा राजनीतिक करियर रहा है। उन्होंने मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया है। राज्यसभा और लोकसभा दोनों में पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करने वाले त्रिवेदी ने कई संसदीय मंचों की अध्यक्षता भी की है, जिनमें भारत-यूरोपीय संघ संसदीय मंच शामिल है। तृणमूल कांग्रेस से होकर बाद में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। उनका व्यापक प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव इस राजनयिक भूमिका में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ढाका में कार्यभार संभालने से पहले, त्रिवेदी ने कोलकाता में नेताजी भवन का दौरा किया और विश्वास व्यक्त किया कि भारत और बांग्लादेश साझा आकांक्षाओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच आपसी संबंधों के आधार पर अपने रिश्तों को मजबूत करूंगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों को भौगोलिक सीमाओं से कहीं अधिक गहरा बताया। इस उच्च-स्तरीय राजनीतिक नियुक्ति को अहम समय में देखा जा रहा है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच कई मुद्दों पर गहन संवाद और सहयोग की आवश्यकता है। आशीष दुबे / 12 जून 2026