राष्ट्रीय
12-Jun-2026


मुंबई, (ईएमएस)। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ दिन पहले दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस गुटों (एनसीपी) के संभावित विलय की अटकलों को सांसद सुप्रिया सुले ने ख़ारिज कर दिया था। इसके बाद अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इस बीच कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नेता नाना पटोले के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। दरअसल नाना पटोले ने शुक्रवार को कहा कि एनसीपी (शरद पवार) के कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव पहले ही दिया जा चुका था। उनके अनुसार, यह प्रस्ताव शरद पवार की ओर से आया था, लेकिन कुछ कारणों से इस पर निर्णय लेने में देरी हुई। पटोले ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में धर्मनिरपेक्ष मतों का बंटवारा रोकना जरूरी है और संविधान तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए समान विचारधारा वाले दलों को एक मंच पर आने की आवश्यकता है। - क्यों तेज हुई विलय की चर्चा? हाल ही में इंडिया गठबंधन की बैठक में कांग्रेस और उससे अलग होकर बने क्षेत्रीय दलों की भविष्य की राजनीतिक भूमिका पर चर्चा हुई थी। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हुई कि विपक्षी दल आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए बड़े स्तर पर एकजुटता की रणनीति बना सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि एनसीपी (शरद पवार) भविष्य की राजनीतिक अनिश्चितताओं से बचने के लिए कांग्रेस के साथ और अधिक निकटता बढ़ाने पर विचार कर सकती है। - संजय राउत ने भी दिया संकेत शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी कहा कि कांग्रेस से अलग होकर बने दलों और नेताओं को वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए फिर से एकजुट होने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में कांग्रेस को एक मजबूत और सक्षम विकल्प के रूप में खड़ा करने के लिए सभी समान विचारधारा वाली शक्तियों का साथ आना आवश्यक है। राउत ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में शरद पवार को पहल करनी चाहिए। - कांग्रेस में विलय का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया- शशिकांत शिंदे इस बीच विलय की चर्चाओं के बीच एनसीपी (शरद पवार) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने स्पष्ट किया कि पार्टी की ओर से कांग्रेस में विलय का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरों में फिलहाल कोई सच्चाई नहीं है। हालांकि, सुप्रिया सुले ने इस मुद्दे पर पूरी तरह से दरवाजा बंद नहीं किया। उन्होंने कहा कि संजय राउत द्वारा दिए गए सुझाव पर विचार किया जाएगा और पार्टी से जुड़े सभी अंतिम निर्णय शरद पवार ही लेंगे। - एनसीपी और कांग्रेस का पुराना रिश्ता राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना 10 जून 1999 को कांग्रेस से अलग होकर की गई थी। इसके बावजूद दोनों दलों की वैचारिक समानता बनी रही और 1999 से लेकर अधिकांश चुनाव दोनों दलों ने गठबंधन में लड़े। महाराष्ट्र में भी लंबे समय तक दोनों दल सत्ता में साझेदार रहे। हालांकि तीन वर्ष पहले एनसीपी में विभाजन हुआ, जिसके बाद शरद पवार का गुट महाविकास आघाड़ी के साथ रहा, जबकि अजित पवार के नेतृत्व वाला गुट महायुति में शामिल हो गया। - राजनीतिक नजरें भविष्य पर फिलहाल कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) दोनों की ओर से किसी संभावित विलय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी नाना पटोले, संजय राउत और सुप्रिया सुले के बयानों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल राजनीतिक अटकलें हैं या फिर महाराष्ट्र की राजनीति में कोई बड़ा पुनर्गठन देखने को मिलेगा। फिलहाल राज्य का राजनीतिक वर्ग इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। संजय/संतोष झा- १२ जून/२०२६/ईएमएस