* हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद पीछे हटे आशाराम; 15 जून को करना होगा सरेंडर, दोनों दुष्कर्म मामलों में भुगत रहे हैं आजीवन कारावास की सजा अहमदाबाद (ईएमएस)| अपने आश्रम की युवतियों के साथ दुष्कर्म के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आशाराम को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए आशाराम ने अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने के लिए दायर अपनी याचिका वापस ले ली है। इसके साथ ही उनका जेल प्रवास फिर से शुरू होगा और उन्हें निर्धारित समय पर जेल प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। गुजरात हाईकोर्ट ने पहले आशाराम को 15 जून तक अंतरिम जमानत प्रदान की थी। जमानत अवधि समाप्त होने से पहले उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए मेडिकल आधार पर जमानत बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने इस मांग का जोरदार विरोध किया। सरकारी वकील ने अदालत में दलील दी कि आशाराम के खिलाफ दर्ज अपराध बेहद गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए उन्हें और राहत नहीं दी जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत के सख्त रुख और कानूनी परिस्थितियों को देखते हुए आशाराम के वकीलों को यह आभास हो गया कि अदालत उनकी याचिका खारिज कर सकती है। इसके बाद किसी प्रतिकूल आदेश से पहले ही उन्होंने रणनीतिक रूप से जमानत विस्तार की याचिका वापस ले ली। याचिका वापस लेने के बाद आशाराम को अंतरिम जमानत के मामले में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। अब उन्हें 15 जून को जेल अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होकर दोबारा जेल जाना होगा। गौरतलब है कि गुजरात के गांधीनगर स्थित सत्र न्यायालय ने सूरत की एक महिला से दुष्कर्म के मामले में आशाराम को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अलावा राजस्थान के जोधपुर में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में भी उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। इन गंभीर मामलों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने जमानत अवधि बढ़ाने की मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद आशाराम को अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी। सतीश/12 जून