राष्ट्रीय
13-Jun-2026
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सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी नई दिल्ली,(ईएमएस)। भाजपा की चुनावी कार्यशैली हमेशा से मिशन मोड पर काम करने के लिए जानी जाती है। चुनावी रणनीतियों को धरातल पर उतारने की इसी खूबी की वजह से पार्टी ने कई राज्यों में ऐतिहासिक सफलताएं हासिल की हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पश्चिम बंगाल है, जहां पिछले चुनावों में महज 72 सीटों पर सिमटने वाली भाजपा ने अपनी मजबूत रणनीति के दम पर दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफलता पाई थी। पश्चिम बंगाल फतह करने के बाद अब पार्टी का अगला बड़ा और मुख्य फोकस पंजाब पर टिक गया है, जहां आज तक कभी भी उसकी पूर्ण बहुमत वाली अपनी सरकार नहीं रही है। पंजाब में अगले साल ही विधानसभा चुनाव होने हैं और इसके लिए राज्य में राजनीतिक बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। भाजपा इस बार राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वर्तमान सत्तारूढ़ दल के खिलाफ जनता में जो असंतोष है, उसके चलते चुनाव से ठीक पहले राज्य में बड़े राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, पंजाब में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा को कोई बहुत बड़ी जीत हासिल नहीं हो सकी थी, लेकिन इन नतीजों को पार्टी ने एक अवसर के रूप में लिया है। इन चुनावों से भाजपा को अपनी जमीनी हकीकत और संगठनात्मक तैयारी को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फीडबैक मिला है, जिसके आधार पर अब नए सिरे से चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है। इस भावी रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए भाजपा ने हाल ही में प्रमुख सिख नेता केवल सिंह ढिल्लो को प्रदेश संगठन की कमान सौंपते हुए पार्टी अध्यक्ष बनाया है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार में मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को भी अपना पूरा समय पंजाब की राजनीति और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में लगाने के निर्देश दिए गए हैं। जिस प्रकार भाजपा ने पश्चिम बंगाल में अन्य दल से आए शुभेंदु अधिकारी पर बड़ा दांव खेला था और सफलता पाई थी, ठीक उसी तरह पंजाब में कांग्रेस छोड़कर आए रवनीत सिंह बिट्टू को एक बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी चल रही है। बिट्टू आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक होंगे। इसके अलावा, भाजपा के परंपरागत समर्थक माने जाने वाले हिंदू समुदाय को साधे रखने के लिए पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता तरुण चुघ को मध्य प्रदेश से राज्यसभा में भेजा है। पंजाब में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कई दिग्गज नेता पहले ही पार्टी में शामिल हो चुके हैं, और हाल ही में आम आदमी पार्टी के भी कई प्रमुख चेहरों ने भाजपा का दामन थामा है। पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों का मानना है कि इस समय पंजाब में वर्तमान सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर अपने चरम पर है और राज्य की जनता एक मजबूत और स्थिर विकल्प की तलाश कर रही है। नेताओं का तर्क है कि पंजाब की जनता कांग्रेस और अकाली दल को पहले ही आजमा कर नकार चुकी है और अब वह वर्तमान सत्तारूढ़ दल की कार्यप्रणाली को भी देख चुकी है। ऐसे में जनता के सामने विकास और सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा ही एकमात्र विश्वसनीय विकल्प बनकर उभर रही है। पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा के पिछले चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो वहां आम आदमी पार्टी को 92, कांग्रेस को 18, शिरोमणि अकाली दल को तीन, भाजपा को दो और बहुजन समाज पार्टी को एक सीट मिली थी, जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई थी। इन पिछले आंकड़ों को पीछे छोड़ते हुए भाजपा इस बार पश्चिम बंगाल की तर्ज पर पंजाब में भी जनता का भरोसा जीतकर एक बड़ा राजनीतिक इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतर रही है। वीरेंद्र/ईएमएस 13 जून 2026