राम, कृष्ण और शिव प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने की धमकियों के दावे ढाका,(ईएमएस)। बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन के गाइबांधा जिले में स्थित एक प्रमुख हिंदू धार्मिक परिसर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कुछ कट्टरपंथी समूह परिसर में स्थापित राम, कृष्ण और शिव की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने तथा परिसर के विस्तार का विरोध कर रहे हैं। इन दावों के बाद क्षेत्र के हिंदू समुदाय और श्रद्धालुओं के बीच चिंता का माहौल है। होसैनपुर यूनियन के रामचंद्रपुर गांव में स्थित यह धार्मिक परिसर पिछले कुछ वर्षों में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरा है। स्थानीय समाजसेवी हरिदास बाबू की पहल से शुरू हुई यह परियोजना अब एक विशाल धार्मिक परिसर का रूप ले चुकी है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस परिसर की प्रमुख पहचान लगभग 50 फीट ऊंची भगवान कृष्ण की प्रतिमा है, जिसे बांग्लादेश की सबसे ऊंची कृष्ण प्रतिमा बताया जाता है। इसका उद्घाटन नवंबर 2025 में भारत के सहायक उच्चायुक्त मनोज कुमार द्वारा किया गया था। इसके बाद से यह स्थल धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गया है। मंदिर समिति की दीर्घकालिक योजना के तहत परिसर में भगवान राम, भगवान शिव सहित विभिन्न देवी-देवताओं की कुल 144 प्रतिमाएं स्थापित करने और अन्य धार्मिक संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के समर्थकों का कहना है कि यह बांग्लादेश की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सह-अस्तित्व का प्रतीक है। विवाद के बीच सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसी कारण राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाएगा और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मामला केवल एक धार्मिक परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। बांग्लादेश का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में किसी भी धार्मिक स्थल या प्रतीक के खिलाफ हिंसा या तोड़फोड़ की धमकियां प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही हैं। हिदायत/ईएमएस 13जून26