विश्व रक्तदान दिवस हर वर्ष 14 जून को मनाया जाता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि यदि कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में रक्त का दान करता है तो यह मानवता के हित में सबसे बड़ा काम है, लेकिन एक आंकड़े के अनुसार हमारे देश की आबादी का केवल 37 प्रतिशत लोग ही रक्तदान करने योग्य हैं, लेकिन उनमें से भी 10 प्रतिशत से भी कम लोग हर साल ब्लड डोनेट करते हैं। पाठकों को जानकारी प्राप्त करके आश्चर्य होगा कि दुनिया भर में हर वर्ष लगभग 11.85 करोड़ (118.5 मिलियन) यूनिट रक्तदान एकत्र किया जाता है तथा विश्व के कुल रक्तदान का 40% हिस्सा उच्च आय वाले देशों से आता है, जबकि वहां दुनिया की केवल 16% आबादी रहती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक यूनिट रक्त को विभिन्न घटकों में विभाजित करके तीन लोगों तक की जान बचाई जा सकती है। एक उपलब्ध जानकारी के अनुसार निम्न आय वाले देशों में दिए जाने वाले रक्त का 54% हिस्सा 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को चढ़ाया जाता है तथा उच्च आय वाले देशों में रक्त प्राप्त करने वालों में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग लगभग 76% हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2008 से 2018 के बीच स्वैच्छिक रक्तदाताओं से प्राप्त रक्तदान में 1.07 करोड़ (10.7 मिलियन) यूनिट की वृद्धि दर्ज की गई। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दुनिया के 79 देशों में 90% से अधिक रक्त आपूर्ति स्वैच्छिक और नि:शुल्क रक्तदाताओं से प्राप्त होती है, जबकि 54 देशों में अब भी आधे से अधिक रक्त परिवार या भुगतान वाले दाताओं से आता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रसव के दौरान या बाद में हर वर्ष लगभग 1.4 करोड़ (14 मिलियन) महिलाएं अत्यधिक रक्तस्राव का सामना करती हैं, जिनके लिए समय पर रक्त उपलब्ध होना जीवनरक्षक साबित होता है। भारत में विभिन्न आकलनों के अनुसार प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख यूनिट रक्त की कमी बनी रहती है, जिसके कारण नियमित स्वैच्छिक रक्तदान का महत्व और बढ़ जाता है। रोचक तथ्य है कि यदि किसी देश की केवल 1% आबादी नियमित रूप से रक्तदान करे, तो अधिकांश देशों की रक्त आवश्यकता पूरी हो सकती है। रक्त आज भी ऐसी जीवनरक्षक वस्तु है जिसे किसी फैक्ट्री में बनाया नहीं जा सकता; इसका एकमात्र स्रोत मानव रक्तदाता ही है। जीवन अमूल्य है और रक्तदान जीवनदान देता है। ब्लड प्रकृति द्वारा मानव को दिया गया सबसे मूल्यवान उपहार है। हम इसके माध्यम से लोगों की कई तरह से मदद कर सकते हैं, मसलन हम बहुत सी जिंदगियां बचा सकते हैं। मानवता की सेवा में रक्तदान सबसे उत्तम सेवा है। बीमारों, जरूरतमंदों के लिए रक्तदान नये जीवन की आशा है। रक्तदान करके हम बहुत से जीवन बचा सकते हैं, इसलिए प्रत्येक स्वस्थ और योग्य व्यक्ति को अपने जीवन में रक्त का दान करने की प्रेरणा लेनी चाहिए और रक्तदान करना चाहिए। जानकारी देना चाहूंगा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस दिन को रक्तदान दिवस के रूप में घोषित किया गया है। रक्तदान को सबसे बड़ा दान माना गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में स्थापित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सुरक्षित रक्त और रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आभार व्यक्त करना है। वास्तव में, इस दिन को 14 जून को मनाने का खास कारण है। जानकारी मिलती है कि वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर ने ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज की थी। उनके इस योगदान के लिए वर्ष 1930 में कार्ल लैंडस्टीनर को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। रक्तदाता दिवस वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर को समर्पित है, जिनका जन्मदिन 14 जून को होता है। यहां यह भी बताता चलूं कि कार्ल लैंडस्टीनर ही वह वैज्ञानिक थे जिन्होंने एबीओ रक्त समूह की खोज की थी। उनका जन्म 14 जून 1868 को हुआ था और उन्हीं की याद में यह दिवस संपूर्ण विश्व में मनाया जाता है। उल्लेखनीय है कि विश्व रक्तदाता दिवस मनाए जाने की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन, अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस संघ, और रेड क्रिसेंट समाज द्वारा सबसे पहले की गई थी। कार्ल लैंडस्टीनर एक ऑस्ट्रियाई जीव वैज्ञानिक, चिकित्सक और प्रतिरक्षा विज्ञानी थे, और उन्हें आधुनिक रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) का संस्थापक माना जाता है। यह उनका योगदान ही है कि आज रोगी के जीवन को खतरे में डाले बिना ब्लड ट्रांसफ्यूजन संभव हो पाया है। कार्ल को उनके अनूठे योगदान के लिए वर्ष 1930 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। आज देश में रोजाना बहुत से एक्सीडेंट होते हैं, थैलेसीमिया के रोगियों, एनीमिया के रोगियों, ब्लड कैंसर जैसी बीमारियों में व बहुत बार डिलीवरी के वक्त महिलाओं को रक्त की जरूरत पड़ती है। कई बार आपात स्थिति में एक्सीडेंट के दौरान या फिर ऑपरेशन या किसी अन्य कारण से खून की आवश्यकता जब मरीज को पड़ती है, ऐसे में रक्तदाताओं द्वारा दान किए गए खून से कई लोगों की जान बचाई जाती है। ऐसे ही ब्लड डोनर्स के महत्व और उन्हें धन्यवाद करने के लिए प्रति वर्ष 14 जून को ‘वर्ल्ड ब्लड डोनर डे‘ संपूर्ण विश्व में मनाया जाता है। रक्तदान को महादान भी कहा गया है, क्योंकि किसी का जीवन बचाने से बड़ी बात कुछ और नहीं हो सकती है। आज लोग धीरे-धीरे इसका महत्व समझने लगे हैं और रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता का माहौल भी देखने को मिल रहा है। फिर भी बहुत सारे व्यक्ति ऐसे भी हैं जिनको अभी भी रक्तदान करने से डर लगता है, रक्तदान को लेकर बहुत सी भ्रांतियां भी लोगों में व्याप्त हैं, तो हमारा कर्तव्य यह बनता है कि हम उन्हें रक्तदान के प्रति जागरूक करें। वास्तव में, अगर हमारी वजह से यदि किसी व्यक्ति की ज़िन्दगी बचती है तो हमें जो संतुष्टि का एहसास होगा उसे शब्दों में बयाँ करना मुमकिन नहीं है। सच तो यह है कि रक्तदान जीवन का सबसे खूबसूरत अहसास है। विश्व रक्तदाता दिवस के लिए हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एक थीम को चुना जाता है ताकि स्वैच्छिक रक्तदान जीवन को बचाने और विभिन्न समुदायों के भीतर एकजुटता बढ़ाने में भूमिका को उजागर किया जा सके। बहरहाल, यहां यह जानकारी देना चाहूंगा कि विश्व रक्तदाता दिवस प्रतिवर्ष 14 जून को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा रक्तदाताओं के अमूल्य योगदान का सम्मान करना है। वर्ष 2025 की थीम- रक्त दें, आशा दें: मिलकर जीवन बचाएं थी, जो रक्तदान के माध्यम से जीवन बचाने और आशा का संचार करने का संदेश देती है। वहीं वर्ष 2026 की थीम- मानवता की एक बूंद। रक्त दें। जीवन बचाएं। रखी गई है। यह थीम मानवता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित करते हुए लोगों को नियमित एवं स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करती है। सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने और अनगिनत जीवन बचाने में रक्तदाताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज रक्त की आपूर्ति मांग की तुलना में कम है, क्योंकि लोगों में रक्तदान के बारे में अनेक तरह की भ्रांतियां हैं। कुछ लोग यह मानते हैं कि रक्तदान करने से कमजोरी आती है, वे बीमार पड़ सकते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। एक स्वस्थ व योग्य व्यक्ति यदि खून दान करता है तो यह उसके स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है, ऐसा चिकित्सकों का कहना है। बहरहाल, जानकारी देना चाहूंगा कि एक अध्ययन में पाया गया कि रक्तदान की आपूर्ति प्रति हज़ार पर 33.8 थी, जबकि मांग 36.3 थी। ऐसे में देश में सालाना एक मिलियन (10 लाख) रक्त की यूनिट्स कम पड़ती हैं। खासतौर पर दूर-दराज के इलाकों में रक्त सुरक्षा का अभाव है। इसका मुख्य कारण है कि लोग रक्तदान के बारे में जागरुक नहीं हैं, कई स्थानों पर इसे उचित नहीं माना जाता है। चिकित्सकों का यह मानना है कि एक नहीं अपितु रक्त दान के ढेरों फायदे हैं। यह न सिर्फ रक्त पाने के लिए बल्कि दान करने वाले के लिए भी फायदेमंद है। डोनर द्वारा नियमित रूप से रक्तदान करने से शरीर में आयरन का स्तर ठीक बना रहता है। दिल की बीमारियों, विशेष प्रकार के कैंसर जैसे लिवर कैंसर तक का खतरा रक्तदान करने से कम हो जाता है। रक्तदान करने से बहुत सी जिंदगियां तो बचती ही हैं साथ ही साथ रक्त दान करने से हमारे मन में संतोष की भावना आती है, हम यह महसूस करते हैं कि हमने किसी को जीवन देने में मदद की है। इससे हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ता है। इससे हमारा रक्त प्रवाह भी अच्छा बना रहता है। रक्त जांच से पहले हमारे शरीर की निःशुल्क शारीरिक जांच की जाती है, इससे हमारे ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, पल्स आदि जांचे जाते हैं। रक्तदान करने से हमारा वजन भी कंट्रोल रहता है। रक्तदान करने के बाद शरीर खून की कमी को पूरा करने में जुट जाता है, जिससे शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं ज़्यादा बनती हैं, और हमारी सेहत में सुधार आता है। रक्तदान करने से हमारी ब्लड ग्रुप, आरएच फैक्टर के अलावा एचआईवी, हेपेटाइटिस, मलेरिया व यौनजनित रोगों की जांच हो जाती है। रक्तदान की पूरी प्रक्रिया के दौरान 20-25 मिनट का समय लगता है। उस समय कोई तकलीफ व दर्द भी नहीं होता है और न ही किसी प्रकार के संक्रमण की संभावना रहती है। बार-बार रक्तदान करने से खून के अवयव (आरबीसी, डब्लूबीसी, हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट्स आदि) जल्दी बनते हैं। खून देने के बाद कुछ देर आराम कर रक्तदाता अपने सामान्य कार्यों को कर सकता है। रक्तदान करने से शरीर की ऑल ओवर फिटनेस सुधरती है। इससे हमारा शरीर चुस्त दुरुस्त रहता है। यह एक मिथक है कि औरतें रक्तदान नहीं कर सकती हैं। चिकित्सकों का मानना है कि 18 से 60 साल की उम्र का कोई भी व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। बस, इसके लिए जरूरी है कि वह स्वस्थ हो और कुछ मानकों को पूरा करता हो। अगर हमें कोई बीमारी है या हम कोई दवा ले रहे हैं तो बेहतर होगा कि रक्तदान से पहले अपने चिकित्सक से सलाह ले लें और रक्तदान के लिए हो रही जांच के समय पूरी जानकारी दें। रक्तदान लोगों को बीमार नहीं करता है। हां, रक्तदान करने के बाद कभी कभार हल्के चक्कर आ सकते हैं, लेकिन इसके लिए रक्तदान से पहले और बाद में हम अपने आहार में कुछ खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं। रक्तदान के बाद हम ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं जिनमें फोलिक एसिड, विटामिन बी 6 और बी 2 होते हैं। इन खाद्य पदार्थों में ऐसे घटक होते हैं, जो हमारे हीमोग्लोबिन स्तर को बढ़ाने में मदद करेंगे। रक्त दान करने से पहले लोगों को चिकित्सकों द्वारा कार्बोनेटेड पेय और फैटी खाद्य पदार्थ से 24 घंटे तक दूर रहने के लिए सलाह दी जाती है। वास्तव में, रक्तदान से हमें हमारी भावी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में भी पता चल जाता है। हम हमारे स्वास्थ्य के बारे में जागरुक बनते हैं। रक्त दान लोगों को एक दूसरे के साथ जोड़ता है, यह सामुदायिक भावना को बढ़ावा देता है, खासतौर पर जब ऐसे रक्त दान अभियान सामुदायिक आयोजनों के रूप में चलाए जाते हैं। इससे एकजुटता, टीम-वर्क और समाज कल्याण की गतिविधियों को काफी बढ़ावा मिलता है। आज लोगों को रक्तदान करने के लिए जागरूक करने की आवश्यकता है, क्योंकि एक रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल में जाने वाले सात लोगों में लगभग एक व्यक्ति को खून की जरूरत होती है, कई बार खून की कमी से लोगों की जान तक चली जाती है। एक जानकारी अनुसार अगर हर व्यक्ति हर तीन महीने में नियमित रूप से रक्तदान करे, तो ख़ून की कमी से किसी को तकलीफ या किसी की जान नहीं जाएगी। अंत में यही कहूंगा कि यदि आप एक रक्तदाता हैं, तो आप किसी के जीवन के लिए एक नायक हैं। (लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। ) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 13 जून /2026