राज्य
13-Jun-2026


16 जून को होगी जनसुनवाई, चेम्बर के पत्र पर ऊर्जा मंत्री ने दिए निर्देश जबलपुर, (ईएमएस)। महाकोशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रवि गुप्ता द्वारा मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर हाल ही में की गई विद्युत दर वृद्धि को अनुचित बताते हुए इसे वापस लेने तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की विसंगतियों को दूर करने की मांग की गई थी। इस पर ऊर्जा मंत्री ने मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी को उपभोक्ताओं को राहत देने संबंधी निर्देश जारी किए हैं। भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों को कई बार निर्देश दिए गए कि सोलर उपभोक्ताओं से किसी प्रकार का सेवा शुल्क न लिया जाए, क्योंकि वितरण कंपनियों के लिए अलग से प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) का प्रावधान है। 27 अगस्त 2025 को जारी पत्र में भी इस निर्देश को दोहराया गया था। इसके बावजूद प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण फरवरी 2024 से लागू इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ प्रदेश के उपभोक्ताओं तक अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच पाया है। मार्च 2027 तक चलने वाली योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश के लिए 6 लाख घरेलू सोलर कनेक्शन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन लगभग तीन-चौथाई अवधि बीत जाने के बाद भी केवल करीब 90 हजार कनेक्शन ही स्थापित हो सके हैं, जो लक्ष्य का मात्र 16 प्रतिशत है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा 16 जून को आयोजित की जाने वाली जनसुनवाई में इस विषय पर चर्चा होगी। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के निर्देशों के बावजूद वितरण कंपनियों द्वारा पालन नहीं किए जाने पर मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम ने आयोग में याचिका क्रमांक 137/2025 प्रस्तुत की थी, जिसके निराकरण के लिए यह जनसुनवाई आयोजित की जा रही है। महाकोशल चेम्बर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शंकर नागदेव ने आयोग के समक्ष सुझाव एवं आपत्तियां प्रस्तुत करते हुए कहा है कि सोलर उपभोक्ता दिन में अतिरिक्त उत्पादित बिजली डिस्कॉम को देते हैं, लेकिन शाम से सुबह तक वही बिजली उपयोग करने पर उनसे लगभग 2 रुपये प्रति यूनिट की दर से फिक्स चार्ज लिया जाता है। उनका कहना है कि यह प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की भावना के विपरीत है तथा देश के अन्य राज्यों में ऐसा शुल्क नहीं लिया जाता। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में जारी बिजली बिलों में सोलर संयंत्र द्वारा कुल उत्पादित बिजली का विवरण नहीं दिया जाता। केवल इम्पोर्ट एवं एक्सपोर्ट यूनिट ही दर्शाई जाती हैं, जिससे उपभोक्ताओं को यह पता नहीं चल पाता कि उनकी स्वयं की उत्पादित एवं उपभोग की गई बिजली पर कोई अतिरिक्त शुल्क तो नहीं लगाया जा रहा है। आयोग से मांग की गई है कि बिजली बिलों में कुल सौर उत्पादन का विवरण भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। चेम्बर ने यह मुद्दा भी उठाया कि सोलर उपभोक्ताओं की अतिरिक्त बिजली, जो प्रतिवर्ष 30 सितम्बर को कैरी फॉरवर्ड होती है, उसे वितरण कंपनियां मात्र 2.15 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदती हैं, जबकि वही बिजली उपभोक्ताओं को लगभग 10 रुपये प्रति यूनिट तक की दर पर उपलब्ध कराई जाती है। इसे उपभोक्ता हितों के प्रतिकूल बताया गया है। महाकोशल चेम्बर के अध्यक्ष रवि गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शंकर नागदेव, कनिष्ठ उपाध्यक्ष युवराज जैन गढ़ावाल, मानसेवी मंत्री अखिल मिश्र, कोषाध्यक्ष हेमराज अग्रवाल, सहमंत्री गुलशन माखीजा, प्रभात जैन, समन्वयक राजेश चंडोक, संगठन मंत्री अनिल जैन पाली एवं संयोजन मंत्री समीर पाल ने आयोग से उपभोक्ताओं के हित में आवश्यक आदेश जारी करने का आग्रह किया है। सुनील साहू / मोनिका / 13 जून 2026/ 05.27