न्यूयार्क (ईएमएस)। फीफा विश्वकप के पहले ही मैच में अमेरिका को पराग्वे के खिलाफ 4-1 से जीत दिलाने वाले फोलारिन बालोगुन नाइजीरियाई मूल के हैं और उनका यहां तक का सफर बेहद कठिन रहा है। उनके जन्म के कुछ समय बाद ही पिता को देश तक छोड़ना पड़ा था। एक समय पर उन्हें इंग्लैंड और नाइजीरिया दोनों देशों से खेलने का प्रस्ताव मिला था पर , फोलारिन ने अमेरिका से खेलने का फैसला किया था। इस फुटबॉर का जन्म न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन इलाके में नाइजीरियाई माता-पिता के घर हुआ था। उनके पैदा होने के महज़ एक महीने बाद ही उनका परिवार इंग्लैंड चला गया, जहां वे लंदन में पले-बढ़े। उन्होंने आठ साल की छोटी उम्र में ही प्रतिष्ठित आर्सेनल अकादमी में दाखिला ले लिया, जिसने उनके फुटबॉल करियर की नींव रखी। युवा स्तर पर उन्होंने इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन साथ ही अमेरिका की अंडर-18 टीम के लिए भी खेलते रहे, जिससे तीनों देशों से उनके जुड़ाव का संकेत मिला। फोलारिन के पास अमेरिका के अलावा, अपने माता-पिता के मूल देश नाइजीरिया और अपने पालन-पोषण वाले देश इंग्लैंड की तरफ से खेलने का भी अवसर था पर उन्होंने समझदारी भरा फैसला लेते हुए अमेरिका को चुना क्योंकि वह जानने थे कि इंग्लैंड की टीम में स्टार खिलाड़ियों की भरमार है, ऐसे में वहां राष्ट्रीय टीम में जगह बना पाना एक बड़ी चुनौती होती, जबकि नाइजीरिया फुटबॉल में काफी पीछे है। उसकी टीम इस विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने में भी असफल रही है। ऐसे में इस फुटबॉलर न का अमेरिका के लिए खेलने का फैसला न केवल उनके लिए बल्कि अमेरिकी फुटबॉल के लिए भी लाभदायक साबित हुआ है। पराग्वे के खिलाफ हुए धमाकेदार मुकाबले में बालोगुन ने दो शानदार गोल दागकर अपनी उपयोगिता साबित की। इस प्रदर्शन से वह 1930 के बाद विश्व कप के किसी मैच में दो गोल करने वाले पहले अमेरिकी खिलाड़ी बन गये। अब बालोगुन अमेरिकी फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक प्रेरणा और उम्मीद का प्रतीक बन गए हैं। उनके सही समय पर लिए गए सही फैसले और मैदान पर उनके असाधारण प्रदर्शन ने उन्हें अमेरिका का हीरो बना दिया है गिरजा/ईएमएस 14 जून 2026