राष्ट्रीय
14-Jun-2026


-सभा आयोजन के ऐलान के बाद प्रशासन अलर्ट भरूच,(ईएमएस)। गुजरात के भरूच शहर में स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। श्री चक्रधर स्वामी जन्म स्थल राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण समिति नामक संगठन ने दावा किया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित इस मस्जिद के अंदर हिंदू और जैन परंपरा की प्राचीन मूर्तियां और अवशेष मौजूद हैं। संगठन द्वारा इन अवशेषों को संरक्षित करने की मांग और आगामी 15 जून को एक बड़ी सभा के आयोजन के ऐलान के बाद स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। ऐहतियात के तौर पर मस्जिद परिसर के साथ-साथ पूरे भरूच शहर में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि जामा मस्जिद के अंदर हिंदू और जैन धर्म की मूर्तियां बेहद दयनीय स्थिति में हैं, जिन्हें बेहतर सुरक्षा और अच्छे रखरखाव की तत्काल आवश्यकता है। संगठन का यह भी दावा है कि इन धार्मिक अवशेषों के साथ-साथ यह स्थान महानुभाव पंथ के संस्थापक चक्रधर स्वामी का जन्मस्थान भी है और जैन तीर्थ स्थल समदी विहार से भी जुड़ा हुआ है। इस धरोहर की सुरक्षा के मद्देनजर संगठन ने एक विशाल सभा बुलाई है, जिसमें करीब पांच हजार लोगों के इकट्ठा होने की संभावना जताई जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में भीड़ जुटने की खबर मिलते ही प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। वीडियो में दिख रहीं खराब हालत में पड़ी मूर्तियां इस पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहे संगठन के प्रमुख सदस्य स्वामी मुक्तेश्वरानंद ने अपने दावों को मजबूत करने के लिए एक वीडियो का हवाला दिया है। उनका कहना है कि हमारे पास एएसआई अधिकारी की मौजूदगी में रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो है, जिसमें स्मारक के ग्राउंड फ्लोर (भूतल) पर प्राचीन मूर्तियां बेहद खराब हालत में बिखरी पड़ी दिखाई दे रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य क्षेत्र की शांति भंग करना नहीं है और न ही मस्जिद में नमाज पढ़े जाने पर उन्हें कोई आपत्ति है। उनकी एकमात्र मांग यह है कि स्मारक के भीतर मौजूद हिंदू और जैन धर्म की इन बहुमूल्य मूर्तियों को सही तरीके से संरक्षित किया जाए। इसी मांग को लेकर 15 जून को हॉस्टल ग्राउंड पर हजारों लोग जुटेंगे और शांतिपूर्वक कलेक्टर कार्यालय जाकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे।बताया जा रहा है कि यह कथित वीडियो इसी साल मार्च के महीने में बनाया गया था, जो सोशल मीडिया पर काफी समय से वायरल हो रहा है। मूर्तियों को संरक्षित करने की मांग करने वाले लोग इस वीडियो को लगातार साझा कर रहे हैं, जिससे इस मुहिम को बल मिला है। जामा मस्जिद ने सभी दावों को खारिज किया दूसरी तरफ, जामा मस्जिद के ट्रस्टी अब्दुल कामथी ने इन सभी दावों और आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि यह ऐतिहासिक स्मारक पूरी तरह से एएसआई के अधीन और संरक्षित है। नियम के मुताबिक, इसके प्रतिबंधित क्षेत्रों में किसी भी आम नागरिक को जाने की अनुमति नहीं होती है। जब इस संबंध में एएसआई के अधिकारियों से पूछा गया कि क्या मस्जिद परिसर के भीतर किसी को वीडियो रिकॉर्डिंग करने की अनुमति दी गई थी, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। ट्रस्टी ने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय के लोग यहां पिछले 700 सालों से शांतिपूर्वक नमाज अदा करते आ रहे हैं और इस परिसर में दूसरे धर्मों के लोग भी आते रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व इलाके के सौहार्द और शांति व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। मस्जिद प्रशासन ने एएसआई और जिला प्रशासन को पत्र लिखकर जामा मस्जिद और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की मांग की है। वीरेंद्र/ईएमएस/14जून2026