कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल की सत्ता पर लंबे समय तक एकछत्र राज करने वाली तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकट और अस्तित्व की लड़ाई से जूझ रही है। हालिया विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की आग भड़क उठी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कई बेहद करीबी और कद्दावर नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। बागी नेताओं का सीधा आरोप है कि ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की मनमानी के कारण पार्टी की यह दुर्दशा हुई है। इस बीच, टीएमसी को अब तक का सबसे बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता और छह बार के दिग्गज सांसद सुदीप बंदोपाध्याय भी अब बागी गुट में शामिल हो गए हैं। राजनीतिक गलियारों में हलचल तब तेज हो गई जब कोलकाता उत्तर लोकसभा सीट से दशकों से सांसद रहे 77 वर्षीय सुदीप बंदोपाध्याय ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उनके साथ बीरभूम की सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद थीं, जो पहले ही बागी रुख अख्तियार कर चुकी हैं। ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार सुदीप बंदोपाध्याय का यह कदम तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और राजनीतिक आघात माना जा रहा है। लोकसभा में टीएमसी के सिर्फ 8 सांसद बचे सुदीप बंदोपाध्याय के पाला बदलने के बाद संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में टीएमसी के बागी सांसदों की संख्या बढ़कर 20 पहुंच गई है। गौरतलब है कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने कुल 29 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन सितंबर 2024 में बशीरहाट के सांसद हाजी शेख नुरुल इस्लाम के असामयिक निधन के बाद यह संख्या घटकर 28 रह गई थी। अब 20 सांसदों के बगावत कर देने के बाद ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहने वाले सांसदों की संख्या महज 8 रह गई है। ममता कैंप में अब केवल अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे गिने-चुने चेहरे ही शेष बचे हैं। यह हाई-प्रोफाइल मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब बागी सांसदों का यह बड़ा धड़ा सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला से मुलाकात करने की तैयारी में है। बागी गुट संसद में खुद को एक स्वतंत्र समूह के रूप में मान्यता देने और केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को बिना शर्त समर्थन देने का औपचारिक दावा पेश करने जा रहा है। विधानसभा में भी टूटने की कगार पर टीएमसी इस बगावत का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल की स्थानीय राजनीति में भी बड़ा भूचाल आने वाला है। सुदीप बंदोपाध्याय की पत्नी और चौरंगी सीट से टीएमसी विधायक नैना बंदोपाध्याय के भी बहुत जल्द बागी विधायकों के गुट में शामिल होने की संभावना है। बंगाल विधानसभा में टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से लगभग 60 विधायक पहले ही हाईकमान के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर चुके हैं। इन विधायकों ने निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में अपना समर्थन दिया है। महुआ मोइत्रा का तीखा पलटवार सुदीप बंदोपाध्याय के इस फैसले पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि सुदीप बंदोपाध्याय का मुखौटा और विग दोनों उतर चुके हैं। सुदीप सिर्फ बोझ बनेंगे: उदयोग मंत्री इस पूरे घटनाक्रम पर कटाक्ष करते हुए पश्चिम बंगाल के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कहा कि सुदीप बंदोपाध्याय कभी किसी के वफादार नहीं रहे और वे जहां भी जाएंगे, सिर्फ एक बोझ साबित होंगे। बहरहाल, टीएमसी नेता कुणाल घोष ने भी इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा है कि जिन लोगों को ममता बनर्जी ने हमेशा शीर्ष पदों से नवाजा, आज वही कठिन समय में उनके खिलाफ खड़े हो गए हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/14जून2026