राज्य
31-Mar-2024
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कोरबा (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ में हाथियों को बेहद पसंद है कोरबा का जंगल। इस जिले पर प्रकृति ने अपनी रेहमत इस कदर बरसाई है कि यहां आने वाले हर एक प्राणी को सुकून की अनुभूति होती है। तभी तो इंसान हो या जंगली जानवर यहां एक बार आने के बाद हर कोई यहीं का हो जाता है। दो दशक पूर्व उड़ीसा के रास्ते हाथियों ने छत्तीसगढ़ में अपनी दस्तक दी थी और 4 हाथी कोरबा के जंगल में पहुंचे थे। हाथियों को कोरबा का जंगल इतना रास आया कि वह अब यहीं के होकर रह गए हैं। पिछले 2 दशक के दौरान कोरबा में हाथियों के कुनबे में वृद्धि हुई है लेकिन जंगल में विचरण के दौरान हाथियों की मौत भी हो रही है। जिसमें जंगल में करंट लगने या फिर अन्य घटनाएं सामने आई हैं। प्रदेश घने जंगल और पहाड़ों से घिरा हुआ है। कोरबा जिले का जंगल बेहद ही समृद्ध है। यही कारण है कि यहां अनेकों प्रजाति के जंगली जीव-जंतु का बसेरा है। गजराज का कुनबा भी यहां खूब फल-फूल रहा है, लेकिन यहां सबसे बड़ी समस्या हाथी-मानव द्वंद्व की है जिसको रोकने के लिए छत्तीसगढ़ शासन वन विभाग के द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है। ऐसा ही एक प्रयास फिर से कोरबा के कटघोरा वन मंडल क्षेत्र मे वन विभाग और छत्तीसगढ़ राइडर्स क्लब के तत्वाधान में किया गया है। कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत ने प्रदेश के बाइकर्स को बुलवाया। जिसमें बाइकर्स के समूह प्रदेशभर के इंजीनियर, डॉक्टर और विभिन्न फील्ड के जानकार शमिल थे। कटघोरा वन मंडल क्षेत्र के हाथी प्रभावित इलाके में उन्होंने दौरा किया। ग्रामीणों से मुलाकात कर उन्हें जागरूक करने का प्रयास किया। साथ ही ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रचार-प्रसार किया गया। पवन सोनी/ईएमएस 31 मार्च 2024