:: न्यायालय में पुनर्विचार की अपील की जानी चाहिए :: इन्दौर (ईएमएस)। यूनियन कार्बाइड के 337 मीट्रिक टन रासायनिक अपशिष्ट को नष्ट करने की योजना को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। इस कचरे को देश के सबसे स्वच्छ शहर इन्दौर के नजदीक पीथमपुर स्थित रामकी एनवायरो इंजीनियर्स लिमिटेड के प्लांट में नष्ट करने की प्रक्रिया पर कई स्थानीय लोग, संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने अपनी आपत्ति जताई है। अब इस विरोध को इन्दौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव का भी समर्थन मिल गया है। महापौर भार्गव ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को रोकने और जनता की चिंताओं का समाधान करने के लिए पुनर्विचार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और इससे पीथमपुर की जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस मामले में न्यायालय में पुनर्विचार की अपील की जानी चाहिए और हम राज्य शासन के अधिकारियों से चर्चा करके इस प्रक्रिया को रोकने और न्यायालय से पुनर्विचार की अपील हेतु प्रयासरत है। उल्लेखनीय है कि यूनियन कार्बाइड का यह कचरा भोपाल गैस त्रासदी से जुड़ा है, जो विश्व की सबसे भयावह औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक मानी जाती है। 40 साल पहले 2-3 दिसंबर 1984 की रात हुई इस त्रासदी में हजारों लोगों की मौत हुई और लाखों लोग प्रभावित हुए। इस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री में करीब 377 मीट्रिक टन जहरीला कचरा रह गया, जो अब तक सुरक्षित तरीके से नष्ट नहीं किया जा सका है। :: कोर्ट आदेश पर शुरू हुई विनिष्टीकरण की प्रक्रिया :: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस कचरे के विनिष्टीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई है। आदेश के अनुसार, इस कचरे को भोपाल से ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से 250 किमी दूर धार जिले के पीथमपुर ले जाया जा रहा है, जहां इसे रामकी फैक्ट्री में नष्ट किया जाएगा। प्रदेश में में औद्योगिक इकाइयों में निकलने वाले रासायनिक तथा अन्य अपशिष्ट के निष्पादन के लिये पीथमपुर में एकमात्र प्लांट है, जहां पर भस्मीकरण से अपशिष्ट पदार्थों का विनष्टीकरण किया जाता है। यह प्लांट प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योगों द्वारा जनित खतरनाक एवं रासायनिक अपशिष्ट के सुरक्षित निष्पादन के लिये स्थापित किया गया है। यह प्लांट सेन्ट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशा-निर्देशानुसार संचालित है। :: फैसले का विरोध :: स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि जहरीले कचरे को पीथमपुर ले जाने से यहां के लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को गंभीर खतरा हो सकता है। कई संगठनों ने दावा किया है कि रामकी फैक्ट्री में इस कचरे को नष्ट करने की प्रक्रिया से जहरीली गैसों और कचरे का रिसाव हो सकता है, जो आसपास के क्षेत्र को प्रभावित करेगा। उमेश/पीएम/31 दिसम्बर 2024