राष्ट्रीय
02-Mar-2025


सरकार की गलत नीतियों से होती है, अफीम की तस्करी डोड़ा-चूरा पर पाबंदी क्यों मंदसौर (ईएमएस)। मध्य प्रदेश का मंदसौर और नीमच जिला अफीम की तस्करी के लिए जाना जाता है। यहां के किसानों को अफीम के लाइसेंस दिए जाते हैं। लाइसेंस की नीति इस तरह से बनाई गई है। जिसके कारण अफीम की तस्करी भी होती है। मध्य प्रदेश में 25983 किसानों को अफीम उत्पादन का पट्टा दिया गया है। अफीम के उत्पादकों से अवैध वसूली सरकारी अधिकारी और नेता नगरी करती है। अफीम के किसानों का कहना है अफीम की खेती का खर्च 2 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर आता है। जबकि अफीम की फसल से कमाई सवा लाख रुपए होती है। जिसके कारण यहां का किसान अवैध रूप से अफीम की खेती करता है। चोरी छुपे उसे बेचता है। 39 साल का औसत रेट 1500 रुपये किलो अफीम उत्पादक किसानों का कहना है। अफीम के उत्पादन की लागत बढ़ती जा रही है। लेकिन सरकार द्वारा अफीम की कीमत उस हिसाब से नहीं बढ़ाई जाती है। जिसके कारण अवैध खेती किस करते हैं। अफीम के किसानों को सरकारी मूल्य बहुत कम दिया जाता है। तस्करी का यह एक सबसे बड़ा कारण है। किसानो की मांग है, सरकार को अफीम का दाम 10000 रुपये किलो निश्चित करना चाहिए। इसके साथ ही लाइसेंस देने में जो भ्रष्टाचार होता है। उसको नियंत्रित करने की जरूरत है। नियमों का सरलीकरण किया जाना जरूरी है। नेतानगरी पुलिस और नारकोटिक्स का गठबंधन मंदसौर और नीमच राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है। सबसे ज्यादा अफीम इन्हीं दोनों जिलों में होती है। अफीम की खेती का लाइसेंस देने से लेकर इसकी खरीदी प्रक्रिया में नेता नगरी का बड़ा दखल होता है। नेतानगरी अफीम की कमाई से दोनों जिलों में फल फूल रही है। नारकोटिक्स विभाग पुलिस विभाग और नेताओं के बीच के गठबंधन से यहां अफीम एवं डोडा चूरा की तस्करी का कारोबार निर्वाध रूप से चलता है। डोडा चूरा पर पाबंदी क्यों 2015 से पहले सरकार किसानों से डोडा चूरा की खरीदी करती थी। एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने डोड़ा चूरा को खेतों में नष्ट करने के आदेश दिए थे। मध्य प्रदेश सरकार ने इसके लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई। जिसके कारण आबकारी विभाग की मिली भगत से डोडा चूरा की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है। 2016 से मध्य प्रदेश सरकार ने डोडा चूरा की सरकारी खरीद बंद कर दी है। जिसके कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार इसकी भरपाई नहीं करती है। डोडा चूरा के नुकसान की क्षतिपूर्ति करे सरकार भारतीय अफीम किसान संघर्ष समिति के नीमच जिला अध्यक्ष का कहना है। सरकार डोडा चूरा नष्ट करने का आदेश देती है। सरकार उसकी क्षति पूर्ति नहीं करती है। अफीम के रेट भी प्रति किलो बहुत कम दिए जा रहे हैं। हर साल सैकड़ो की संख्या में किसान जेल जाते हैं। नीमच और मंदसौर जिले के किसान, स्थानीय नेताओं,नारकोटिक्स के अधिकारी और पुलिस के उत्पीड़न के शिकार होते हैं। जिसके कारण यहां किसानों में रोष बढ़ रहा है। एसजे/ 2 मार्च /2025